छत्तीसगढ़

सभी स्कूलों की होगी सुरक्षा जांच

Security checks will be conducted at all schools.

रायपुर। दिल्ली में पांच मंजिला भवन ढहने जैसे हादसे को रोकने के लिए छत्तीसगढ़ में हॉस्टल, पीजी, कोचिंग सेंटर, स्कूल और बड़े शैक्षणिक भवनों का तत्काल सेफ्टी ऑडिट कराया जाएगा। पुराने, जर्जर और जोखिमपूर्ण भवनों की पहचान कर समय रहते कार्रवाई होगी।

जांच और सुरक्षा मानकों के पालन में लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय कर कड़ी कार्रवाई होगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस मामले में गुरुवार को सभी जिलों के कलेक्टर-एसपी के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासन की जिम्मेदारी केवल किसी घटना के बाद कार्रवाई करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए।

संभावित खतरों की पहले से पहचान कर उन्हें दूर करना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से साफ शब्दों में कहा कि दुर्घटना का इंतजार करने के बजाय पहले से ही स्कूलों, छात्रावासों, पुस्तकालयों और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर पुराने भवनों की सुरक्षा जांच की जाए। जिन भवनों से जनहानि की आशंका हो, उन्हें चिह्नित कर आवश्यक कार्रवाई की जाए। बच्चों और विद्यार्थियों से जुड़े संस्थानों में सुरक्षा मानकों का हर हाल में पालन होना चाहिए। यह सभी कलेक्टर और एसपी को जिम्मेदारी होगी कि निर्देशों का असर जमीन पर दिखाई दे। कलेक्टर और एसपी को तत्काल कार्रवाई शुरू करने के साथ इसकी नियमित समीक्षा करने को कहा गया है।

अवैध-मिलावटी शराब पर भी सख्ती मुख्यमंत्री ने अवैध और मिलावटी शराब के खिलाफ प्रदेशभर में विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। आबकारी विभाग, पुलिस और जिला प्रशासन संयुक्त टीम बनाकर अवैध शराब के निर्माण, भंडारण, बिक्री और परिवहन वाले संभावित ठिकानों पर छापेमारी करेंगे। सीमावर्ती क्षेत्रों में दूसरे राज्यों से आने वाली अवैध शराब रोकने के लिए निगरानी बढ़ाई जाएगी। मिलावट या अवैध कारोबार में शामिल लोगों पर कठोर वैधानिक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

केवल कागजों पर सुरक्षा का दावा प्रदेश में 3500 से अधिक स्कूल भवन ‘अत्यंत जर्जर’ श्रेणी में हैं, जहां बच्चों को बैठाना खतरनाक है। बस्तर संभाग के सुदूर क्षेत्रों से लेकर रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर तक के प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक स्कूल खस्ताहाल हैं। छत्तीसगढ़ में करीब ढाई से तीन हजार निजी पीजी/हॉस्टल और हजार से अधिक कोचिंग सेंटर चल रहे हैं। इनमें से आधे से ज्यादा संस्थानों के पास न तो ‘स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट’ है और न ही ‘फायर सेफ्टी एनओसी’। राज्य में ऐसा कोई एकीकृत सरकारी पोर्टल या डेटाबेस ही नहीं बना, जिससे यह पता चल सके कि किस शहर में कितने प्राइवेट हॉस्टल या कोचिंग सेंटर सुरक्षा मानकों को पूरा कर रहे हैं। अधिकांश कोचिंग और पीजी कमर्शियल नक्शा पास कराने के बजाय आम आवासीय मकानों और तंग गलियों की बहुमंजिला इमारतों में चलाए जा रहे हैं।

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