छत्तीसगढ़

सोलर सप्लाई के नाम पर 22 लाख से ज्यादा की ठगी

Fraud of over ₹22 lakh under the pretext of solar supply

रायपुर। प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत सोलर प्लांट लगाने वाले भाठागांव के कारोबारी को सूरत की कंपनी से सोलर पैनल और इनवर्टर खरीदना महंगा पड़ गया। सामान की सप्लाई के नाम पर कारोबारी से 22.49 लाख रुपये एडवांस लेने के बाद भी डिलीवरी नहीं की गई। रकम वापस मांगने पर भी लगातार टालमटोल की गई। कारोबारी की शिकायत पर पुरानी बस्ती पुलिस ने सूरत, गुजरात निवासी प्रशांत सिंह ठाकुर के खिलाफ अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस के अनुसार धमतरी जिले के सांकरा निवासी दीप चंद साहू भाठागांव में एलडी कंस्ट्रक्शन के नाम से सोलर प्लांट लगाने का काम करते हैं। ग्राहकों के आर्डर के आधार पर वे अलग-अलग कंपनियों के सोलर पैनल और उनसे जुड़े उपकरण उपलब्ध कराते हैं। इसी दौरान उन्हें सूरत की एक कंपनी की ओर से फोन आया। फोन करने वालों ने छत्तीसगढ़ में सोलर पैनल लगाने वाले वेंडर के रूप में काम करने की जानकारी ली और कंपनी के पास सोलर पैनल व संबंधित उपकरण उपलब्ध होने की बात कही।

कोटेशन से शुरू हुआ सौदा

कंपनी की ओर से वारी कंपनी के सोलर पैनल और इनवर्टर का कोटेशन भेजा गया। कारोबारी को कीमत उचित लगी तो वह अपने मित्र के साथ 11 मार्च 2026 को सूरत पहुंचा। वहां कंपनी के कार्यालय में प्रशांत सिंह ठाकुर से मुलाकात हुई। बातचीत के बाद सामान की सप्लाई के लिए एडवांस रकम देने की बात तय हुई।
कारोबारी ने 11 मार्च को दो बार 4.90-4.90 लाख रुपये और 12 मार्च को 4.99 लाख रुपये कंपनी के खाते में जमा किए। इस तरह शुरुआती तौर पर 14.79 लाख रुपये का भुगतान किया गया। कंपनी ने सात से 10 दिन के भीतर सामान रायपुर पहुंचाने का भरोसा दिया था।

समय बीता, सामान नहीं आया

तय समय निकलने के बाद भी सोलर पैनल और इनवर्टर की डिलीवरी नहीं हुई। कारोबारी ने कंपनी से संपर्क किया तो बाजार में सामान की उपलब्धता कम होने की बात कही गई। इसके बाद 28 मार्च तक सामान पहुंचाने का आश्वासन दिया गया।
28 मार्च तक भी माल नहीं पहुंचा। कारोबारी ने दोबारा कंपनी से संपर्क किया तो उसे बताया गया कि परिवहन का बड़ा साधन उपलब्ध है। कंपनी की ओर से यह भी कहा गया कि यदि उसे अतिरिक्त सामान चाहिए तो वह उसी परिवहन से एक साथ भेजा जा सकता है।

अतिरिक्त ऑर्डर के नाम पर 7.70 लाख और

कंपनी की इस बात पर भरोसा करते हुए कारोबारी ने अतिरिक्त सामान का आर्डर दे दिया। इसके लिए आरोपित की ओर से फिर एडवांस रकम मांगी गई। कारोबारी ने एक अप्रैल को 7.70 लाख रुपये एनईएफटी के माध्यम से कंपनी के दूसरे बैंक खाते में जमा किए।
इस भुगतान के बाद कंपनी को दी गई कुल रकम 22.49 लाख रुपये हो गई। कारोबारी को उम्मीद थी कि अब पहले और अतिरिक्त आर्डर का सामान एक साथ पहुंच जाएगा, लेकिन इसके बाद भी डिलीवरी नहीं हुई।

ई-मेल से भी दिया डिलीवरी का भरोसा

कारोबारी के लगातार संपर्क करने पर कंपनी की ओर से ई-मेल के माध्यम से सामान 21 से 30 अप्रैल के बीच पहुंचाने की बात कही गई। साथ ही सामान नहीं पहुंचने की स्थिति में पूरी रकम वापस करने का भरोसा दिया गया।

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