छत्तीसगढ़

दीपावली पर गूंजता सुआ नृत्य, नई फसल के स्वागत और सुख-समृद्धि की अनूठी लोकपरंपरा

The 'Sua' dance resonates during Diwali—a unique folk tradition celebrating the new harvest and wishing for prosperity and well-being.

लोकेश्वर सिन्हा, गरियाबंद 

 

गरियाबंद। दीपावली तक खेतों में धान की फसल पककर कट जाती है। किसान की मेहनत का फल घर आ जाता है।

छत्तीसगढ़ में सुआ का मतलब होता है *तोता* छत्तीसगढ़ी में तोते को सुआ / सुवा / मिट्ठू कहते हैं। इसी तोते के नाम पर इस लोक नृत्य-गीत का नाम *सुआ नृत्य* पड़ा है। यह छत्तीसगढ़ का सबसे प्रसिद्ध और सबसे ज्यादा किया जाने वाला महिला लोकनृत्य है।

सुआ गीत नई फसल के स्वागत का गीत है। महिलाएं इसे समृद्धि का प्रतीक मानती हैं।

 

कार्तिक मास में दीपावली के समय गौरा उत्सव मनाया जाता है, गौरा यानी माता पार्वती और गौरा उत्सव यानी शिव-पार्वती के विवाह का उत्सव।

मान्यता है कि टोकरी में रखे गए सुआ की जोड़ी शंकर और पार्वती के प्रतीक होते हैं।

 

महिलाएं घर, दुकान गली के चौराहे मे जाकर सुआ गीत गाती हैं। इससे जो राशि / अनाज मिलता है, उससे वे धूमधाम से गौरा-गौरी की पूजा करती हैं। इसलिए सुआ नृत्य की शुरुआत दीपावली के दिन से मानी जाती है।

 

लोक मान्यता है कि तोता महिलाओं को प्रिय होता है और वह इंसानों की तरह बोल भी पाता है।

महिलाएं सुआ को देवताओं का प्रतिनिधि मानती हैं। वे मानती हैं कि सुवा सब सुनता है, सब गुनता है और वो जैसा-जैसा बोलेंगी वैसा-वैसा रट लेगा और फिर वही बातें देवता के सामने जाकर दोहराएगा।

 

सुआ गीत मुख्य रूप से महिलाओं के मन के भाव को व्यक्त करता है। यह महिलाओं के मनोभावों, सुख-दुख आदि की अभिव्यक्ति का माध्यम होता है।

 

युवा लड़कियां अपनी मां, दादी, चाची के साथ नाचकर यह परंपरा सीखती हैं। आज भी गांवों में दीपावली के समय 10-15 महिलाओं और लड़कियों की टोली एक जैसी साड़ी पहनकर, बालों में फूल लगाकर गली-मोहल्ले में सुआ नृत्य करती दिखती है।

 

महिलाएं बांस की टोकरी में लकड़ी या मिट्टी से बने तोते की प्रतिमा रखती हैं। उसके पास शिव और पार्वती कि फोटो रखा जाता है।

 

गांव में घर-घर जाकर और शहर मे दुकानों के पास नृत्य करती है। लोग उन्हें उपहार में पैसे या अनाज देते हैं। मान्यताओं के अनुसार सुआ गीत नृत्य करने वाली महिलाओं को गांव में किसानों के घर-घर जाने पर उपहार स्वरूप पैसे या अनाज दिया जाता है।

और उपहार लेने के बाद गीत के माध्यम से उपहार देने वालो क़ो आशीर्वाद भी दिया जाता है।

 

यह सिर्फ मनोरंजन नहीं, पूजा है। सुआ को शिव-पार्वती का प्रतीक मानकर महिलाएं सुखी जीवन और धन-समृद्धि की कामना करती हैं। इस नृत्य को धन और सुखी जीवन के लिए आशीर्वाद का माध्यम माना जाता है।

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