छत्तीसगढ़

बारिश आई, फिर डूबा भोपालपट्टनम

The rains came, and Bhopalpatnam was submerged again.

भोपालपट्टनम। नगर पंचायत भोपालपट्टनम में पहली ही बारिश ने विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति उजागर कर दी है। नगर के कई वार्डों में जलभराव की गंभीर समस्या एक बार फिर सामने आई है। नालों और नालियों की समुचित सफाई नहीं होने तथा जल निकासी व्यवस्था कमजोर होने के कारण बारिश का पानी सड़कों और लोगों के घरों में घुस रहा है। इससे आमजन का जनजीवन प्रभावित हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या पिछले पांच वर्षों से लगातार बनी हुई है, लेकिन इसके स्थायी समाधान की दिशा में अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है।

नगरवासियों के अनुसार प्रत्येक वर्ष बरसात से पहले नालों की सफाई और विकास कार्यों पर लाखों रुपये खर्च किए जाने का दावा किया जाता है, लेकिन इसका लाभ धरातल पर दिखाई नहीं देता। लोगों का आरोप है कि नालों की नियमित सफाई नहीं होने से उनमें मिट्टी, कचरा और झाड़ियां जमा रहती हैं, जिससे पानी का बहाव रुक जाता है और थोड़ी सी बारिश में ही सड़कों पर पानी भर जाता है।

छोटे नालों के कारण बढ़ रही परेशानी

सबसे अधिक परेशानी मुख्य मार्ग से लगे वार्डों में देखने को मिल रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क किनारे बनाए गए नाले वर्षा जल की मात्रा के अनुरूप पर्याप्त नहीं हैं। पहाड़ी क्षेत्रों से आने वाला तेज बहाव वाला पानी छोटे नालों में समा नहीं पाता और सीधे गलियों तथा घरों में प्रवेश कर जाता है। इससे लोगों को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ रोजमर्रा की परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है।

## हर वर्ष दोहराई जाती है वही समस्या

नगरवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार नगर पंचायत, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के सामने इस समस्या को उठाया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। बरसात शुरू होते ही कई वार्डों की सड़कें तालाब जैसी दिखाई देने लगती हैं। कई परिवारों को रातभर जागकर घरों से पानी बाहर निकालना पड़ता है। सबसे अधिक परेशानी छोटे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को होती है।

अधिकारियों की कार्यशैली पर उठे सवाल

स्थानीय लोगों ने नगर पंचायत के अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि नगर की समस्याओं के बावजूद नियमित निरीक्षण नहीं किया जाता। सफाई व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं है, जिसके कारण नालों में गंदगी जमा रहती है और जल निकासी बाधित होती है। नागरिकों ने विकास कार्यों में पारदर्शिता की भी मांग की है। उनका कहना है कि निर्माण कार्यों पर खर्च तो दिखाया जाता है, लेकिन उनकी गुणवत्ता और उपयोगिता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।

जनप्रतिनिधियों से बढ़ी नाराजगी

नगरवासियों में जनप्रतिनिधियों के प्रति भी असंतोष बढ़ता जा रहा है। लोगों का कहना है कि चुनाव के समय विकास के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद मूलभूत समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जाता। पांच वर्षों से लगातार जलभराव की समस्या बनी हुई है, फिर भी इसके स्थायी समाधान के लिए कोई प्रभावी योजना सामने नहीं आई।

तकनीकी सर्वे और स्थायी समाधान की मांग

सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों ने प्रशासन से पूरे नगर की जल निकासी व्यवस्था का तकनीकी सर्वे कराने, सभी नालों की नियमित सफाई सुनिश्चित करने तथा आवश्यकता के अनुसार उनका चौड़ीकरण और गहरीकरण कराने की मांग की है। नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो हर वर्ष बरसात के मौसम में लोगों को इसी तरह परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।

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