छत्तीसगढ़

खनिज ब्लॉकों की नीलामी से प्रदेश को 4 लाख करोड़ की उम्मीद

State expects ₹4 lakh crore from mineral block auctions.

रायपुर। छत्तीसगढ़ ने उग्रवाद और नक्सलवाद के साए से बाहर निकलकर देश के अग्रणी खनिज उत्पादक राज्यों में अपनी जगह बना ली है। गैर-ईंधन खनिजों के उत्पादन के मामले में ओडिशा के बाद छत्तीसगढ़ देश के शीर्ष पायदान पर पहुंच गया है। यह देश का एकमात्र ऐसा राज्य है जहां टिन अयस्क का व्यावसायिक स्तर पर खनन किया जा रहा है। इसके साथ ही, जल्द ही यहां देश का पहला कमर्शियल लिथियम ब्लॉक भी चालू होने जा रहा है। हाल ही में नीलाम किए गए 65 खनिज ब्लॉकों से राज्य सरकार को आगामी 50 वर्षों में लगभग ₹4 लाख करोड़ का भारी-भरकम राजस्व प्राप्त होने का अनुमान जताया गया है।

अंतरराष्ट्रीय निर्भरता में आएगी कमी

दंतेवाड़ा और सुकमा जैसे सुदूर अंचलों में टिन अयस्क के मिलने से सोल्डरिंग और सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए भारत की चीन, इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे देशों पर निर्भरता काफी हद तक कम होगी। छत्तीसगढ़ की धरा के नीचे लिथियम, कोयला, लौह अयस्क, स्वर्ण, हीरा और बॉक्साइट सहित 28 से अधिक प्रकार की मूल्यवान खनिज संपदा मौजूद है, जो प्रदेश को आर्थिक रूप से सुदृढ़ कर रही है।

क्रिटिकल मिनरल्स और ईवी इंडस्ट्री का मुख्य केंद्र

राज्य अपनी प्राकृतिक संपदा के दम पर न केवल देश की औद्योगिक आवश्यकताओं को पूरा कर रहा है, बल्कि खुद के विकास को भी रफ्तार दे रहा है। कोयले और लोहे के अतिरिक्त सेमीकंडक्टर तथा इलेक्ट्रिक वाहन (EV) उद्योग के लिए अनिवार्य ‘क्रिटिकल मिनरल्स’ भी यहां प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। कानून के अनुसार, जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) के तहत खदानों से प्राप्त रॉयल्टी के कम से कम 60 प्रतिशत हिस्से का उपयोग स्थानीय प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और पौधारोपण जैसे जनहित के कार्यों में किया जा रहा है।

किस अंचल में कौन सा खनिज?

प्रदेश में 200 से अधिक छोटी-बड़ी खदानें और माइनिंग ब्लॉक संचालित हैं:

कोयला बेल्ट: कोरिया, सूरजपुर, सरगुजा, रायगढ़ और कोरबा प्रमुख कोल बेल्ट हैं। कोरबा की गेवरा, दीपका और कुसमुंडा खदानें देश की विशालतम कोयला खदानों में शामिल हैं, जहां से देश भर के थर्मल पावर प्लांट संचालित होते हैं।

लौह अयस्क एवं टिन: दंतेवाड़ा की बैलाडीला और बालोद की दल्ली-राजहरा खदान से उच्च श्रेणी का लौह अयस्क निकाला जाता है, जिसका निर्यात जापान तक किया जाता है। वहीं दंतेवाड़ा व सुकमा देश का एकमात्र टिन उत्पादक केंद्र हैं।

सीमेंट हब और बॉक्साइट: बिलासपुर, रायपुर और बलौदाबाजार-भाटापारा चूना पत्थर के प्रचुर भंडार के कारण ‘सीमेंट हब’ के रूप में जाने जाते हैं। बिलासपुर की हिररी खदान से डोलोमाइट और सरगुजा के मैनपाट से बॉक्साइट निकाला जाता है, जो बालको प्लांट को आपूर्ति किया जाता है।

क्रिटिकल मिनरल्स और सोना: बलरामपुर में ग्रेफाइट और वैनेडियम के भंडार हैं, जबकि महासमुंद में निकेल व क्रोमियम के नए ब्लॉक पाए गए हैं। महासमुंद के सोनखान और जशपुर की इब नदी की रेत से सोना प्राप्त होता है।

हीरा और लिथियम: गरियाबंद की किंबरलाइट चट्टानों में बहुमूल्य हीरे का भंडार है। कोरबा के कटघोरा में देश का पहला व्यावसायिक लिथियम ब्लॉक स्थित है, जो बैटरी और सोलर स्टोरेज सेक्टर के लिए गेमचेंजर साबित होगा।

राजस्व में ऐतिहासिक वृद्धि

नवा रायपुर में आयोजित स्टेट माइनिंग कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जानकारी दी थी कि 65 नए खनिज ब्लॉकों की सफल नीलामी से प्रदेश को अगले 50 वर्षों में करीब ₹4 लाख करोड़ का राजस्व मिलेगा। उल्लेखनीय है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ ने ₹16,625 करोड़ का रिकॉर्ड खनिज राजस्व अर्जित किया था, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में लगभग 14 प्रतिशत अधिक था।

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