छत्तीसगढ़

बेमेतरा में रिकॉर्ड हेरफेर के गंभीर आरोप

Serious allegations of record tampering in Bemetara.

रायपुर। बेमेतरा जिले के देवरबीजा उपतहसील में पदस्थ नायब तहसीलदार राजाराम लहरे पर न्यायालयीन रिकॉर्ड में हेरफेर, बैकडेट में आदेश दर्ज करने और दस्तावेज गायब करने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। रायपुर निवासी शिवशंकर पाठक ने राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के राज्य सचिव को आवेदन देकर लोकसेवक के विरुद्ध अभियोजन चलाने की पूर्व स्वीकृति मांगी है।

आवेदन में दावा किया गया है कि ग्राम खम्हरिया-एम की भूमि विवाद से जुड़े मामलों में आर्डरशीट में बदलाव कर पक्ष विशेष को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई। मामले में बिलासपुर हाईकोर्ट के निर्देशों की अवहेलना करते हुए सीमांकन प्रक्रिया पूरी करने का भी आरोप लगाया गया है। वहीं प्रशासन ने भी सीमांकन प्रक्रिया में प्रक्रियात्मक और तथ्यात्मक कमियां पाए जाने की बात आदेश में स्वीकार की है।

बैकडेट आदेश और आर्डरशीट बदलने का आरोप

आवेदन के अनुसार प्रकरण क्रमांक 202604231200002/अ-12 का आनलाइन पंजीयन एक अप्रैल 2026 को हुआ था। जबकि आवेदन दो अप्रैल को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। बावजूद इसके पहली आर्डरशीट 26 मार्च 2026 की तारीख में दर्ज किए जाने का आरोप लगाया गया है। इसी प्रकार एक अन्य प्रकरण में पांच मार्च को आदेश जारी होने के बाद आर्डरशीट में दो अप्रैल की तारीख अंकित कर पुनर्विलोकन के लिए एसडीओ कार्यालय भेजने की बात कही गई है। आवेदक ने इसे सुनियोजित रिकार्ड हेरफेर बताया है।

हाईकोर्ट निर्देश के बाद भी पूरा किया सीमांकन

आवेदन में कहा गया है कि बिलासपुर हाईकोर्ट ने संबंधित मामले में आवेदक की आपत्तियों पर सुनवाई कर नियमानुसार निर्णय लेने के निर्देश दिए थे। बावजूद इसके सात दिनों के भीतर सीमांकन प्रक्रिया पूरी कर दी गई। साथ ही पूर्व तहसीलदार द्वारा जारी स्थगन आदेश की आर्डरशीट रिकार्ड से गायब होने का भी आरोप लगाया गया है। सीमांकन के दौरान प्रस्तुत दो पन्नों के आपत्ति पत्र और 33 पन्नों के दस्तावेज भी रिकार्ड में नहीं मिलने की बात सामने आई है।

नक्शे और खसरे में गड़बड़ी का दावा

मामले में वर्ष 2023 के नक्शे में खसरा नंबर 595 की जगह 495 दर्ज होने और बाद में बिना सक्षम आदेश के सुधार किए जाने का जिक्र किया गया है। आवेदक ने चकबंदी नक्शे और वर्तमान राजस्व रिकार्ड में अंतर होने का दावा किया है। आवेदन में पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और संबंधित नायब तहसीलदार के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की अनुमति देने की मांग राज्य शासन से की गई है। मामले को लेकर राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।

विभागीय जांच के निर्देश, सीमांकन की विश्वसनीयता संदिग्ध

प्रशासनिक आदेश में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व बेरला को संबंधित न्यायालयीन कार्यों, अभिलेखों और प्रकरणों की सम्यक जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश में कहा गया है कि सीमांकन कार्यवाही में प्रक्रियात्मक और तथ्यात्मक कमियां परिलक्षित हुई हैं, जिससे उसकी विश्वसनीयता और शुद्धता संदिग्ध हो गई है। साथ ही वादभूमि का सीमांकन तहसीलदार बेरला से दोबारा नियमानुसार कराने के निर्देश दिए गए हैं। एक सप्ताह के भीतर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने को भी कहा गया है।

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