“शराब दुकान पर सियासत तेज, मंत्री बोले- गांव की मंजूरी पहली शर्त”
Politics heats up over liquor shops; Minister says village approval is the first condition.

कोरबा : बरबसपुर में शराब दुकान खोलने की तैयारी को लेकर शुरू हुआ ग्रामीणों का विरोध अब राजनीतिक टकराव में बदल गया है। गांव की महिलाओं और ग्रामीणों के आंदोलन के बाद आबकारी विभाग ने फिलहाल दुकान खोलने की प्रक्रिया रोक दी है। इस बीच आबकारी मंत्री लखनलाल देवांगन व पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।
रविवार को कोरबा में आयोजित नशामुक्ति कार्यक्रम में पहुंचे मंत्री देवांगन ने पत्रकारों से चर्चा के दौरान कहा कि बरबसपुर में शराब दुकान शुरू करने का कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ था। आबकारी विभाग के अधिकारी केवल संभावित स्थान का निरीक्षण करने गए थे। उन्होंने कहा कि यदि गांव की महिलाओं को शराब दुकान स्वीकार नहीं है तो वहां दुकान नहीं खोली जाएगी। मंत्री ने यह भी कहा कि महिलाएं उनसे फोन पर अपनी बात कह देतीं तो आंदोलन करने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
मंत्री के इस बयान को लेकर पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने मंत्री की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बरबसपुर के लोग शराब दुकान के खिलाफ एकजुट होकर आंदोलन कर रहे हैं। महिलाओं के सड़क पर उतरने और गांव में बढ़ते विरोध के बाद सरकार को अपना कदम पीछे खींचना पड़ा है। उन्होंने कहा कि अब मंत्री यह कहकर स्थिति संभालने का प्रयास कर रहे हैं कि दुकान खोलने का निर्णय नहीं हुआ था। उन्होंने कहा कि यदि शराब दुकान खोलने की कोई तैयारी नहीं थी तो आबकारी विभाग के अधिकारी बरबसपुर में स्थान देखने क्यों पहुंचे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले रामपुर क्षेत्र में शराब दुकान शुरू करने की कोशिश की गई, लेकिन वहां लोगों के विरोध के कारण योजना आगे नहीं बढ़ सकी।
इसके बाद बरबसपुर में दुकान खोलने की तैयारी शुरू की गई, लेकिन यहां भी ग्रामीणों ने एकजुट होकर विरोध कर दिया।
मंत्री देवांगन के बयान के बाद अब सबकी नजर आबकारी विभाग के अगले निर्णय पर टिकी है। गांव के लोगों का कहना है कि केवल आश्वासन नहीं, बल्कि शराब दुकान नहीं खोले जाने का स्पष्ट निर्णय होना चाहिए।



