छत्तीसगढ़

रेल परियोजना पर 8 साल से सिर्फ वादे, काम शून्य

Only promises for the rail project for 8 years; zero progress.

कवर्धा। डोंगरगढ़-कवर्धा-कटघोरा रेल परियोजना की धीमी प्रगति को लेकर भारतीय किसान संघ ने सरकार पर सवाल उठाते हुए परियोजना की वर्तमान स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि वर्ष 2018 में बहुप्रतीक्षित रेल परियोजना का भूमिपूजन होने के बावजूद आठ वर्ष बाद भी निर्माण कार्य धरातल पर दिखाई नहीं दे रहा है। किसानों, व्यापारियों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों की वर्षों पुरानी उम्मीदें अब भी अधूरी हैं, जबकि जिले के विकास के लिए यह परियोजना अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

भारतीय किसान संघ के किसान दिनेश चंद्रवंशी ने कहा कि भूमिपूजन के समय जिले को रेल नेटवर्क से जोड़ने, रोजगार, उद्योग, व्यापार और पर्यटन को नई गति मिलने का भरोसा दिया गया था। लेकिन आज तक परियोजना पर ऐसी कोई ठोस प्रगति नजर नहीं आती, जिससे लोगों को निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद बंधे। संगठन ने सवाल उठाया है कि आखिर परियोजना किस स्तर पर लंबित है और अब तक निर्माण कार्य शुरू क्यों नहीं हो सका।

किसान, व्यापारी और विद्यार्थी सबसे अधिक प्रभावित

प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि रेल सुविधा नहीं होने से किसानों को अपनी उपज दूरस्थ बाजारों तक सड़क मार्ग से भेजनी पड़ती है, जिससे परिवहन लागत बढ़ती है और लाभ घटता है। व्यापारी वर्ग भी माल ढुलाई के लिए पूरी तरह सड़क परिवहन पर निर्भर है। वहीं हजारों विद्यार्थी और नौकरीपेशा युवा शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, रोजगार और उपचार के लिए लंबी बस यात्राएं करने को मजबूर हैं। रेल सुविधा मिलने से समय, लागत और संसाधनों की बचत होने के साथ क्षेत्र के विकास को नई दिशा मिल सकती है।

सरकार से मांगी परियोजना की स्पष्ट कार्ययोजना

भारतीय किसान संघ ने कहा है कि वर्तमान में केंद्र और राज्य, दोनों स्थानों पर एक ही दल की सरकार होने तथा जिले का प्रतिनिधित्व उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा द्वारा किए जाने से लोगों को परियोजना के शीघ्र पूरा होने की उम्मीद थी। संगठन ने मांग की है कि सरकार रेल परियोजना की वर्तमान स्थिति, निर्माण कार्य शुरू होने की समय-सीमा तथा लंबित होने के कारणों की सार्वजनिक जानकारी दे। यदि प्रशासनिक, वित्तीय या तकनीकी बाधाएं हैं तो उन्हें भी स्पष्ट किया जाए।

परिणाम नहीं मिले तो आंदोलन की चेतावनी

संगठन ने कहा कि कबीरधाम जिले के लगभग आठ लाख नागरिक अब केवल घोषणाएं और आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर परिणाम देखना चाहते हैं। यदि शीघ्र सकारात्मक पहल नहीं हुई तो किसान, व्यापारी, विद्यार्थी, युवा, महिलाएं और सामाजिक संगठन लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से जनआंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। भारतीय किसान संघ ने सभी जनप्रतिनिधियों से इस परियोजना को सर्वोच्च प्राथमिकता देकर संसद और विधानसभा में प्रभावी ढंग से उठाने तथा निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ कराने की मांग की है।

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