मध्यप्रदेश

जिस आजादी के लिए जेल गए, उसी आजादी के पर्व पर दुनिया को कहा अलविदा

On the very festival of the freedom for which he had gone to jail, he bade farewell to the world.

रीवा, मप्र | रिपोर्टर- सुभाष मिश्रा

स्वतंत्रता सेनानी जवाहर सिंह को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई, 1932 में 6 माह जेल और 100 रुपए जुर्माना भुगता था

रीवा। देश जब 15 अगस्त को आजादी का 80वां पर्व मना रहा था, उसी दिन रीवा जिले के जवा तहसील अंतर्गत ग्राम डोरी-भितरी ने अपने एक स्वतंत्रता सेनानी को अंतिम विदाई दी। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जवाहर सिंह का 15 अगस्त 2026 को निधन हो गया। उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया। तिरंगे के सम्मान में देश जश्न मना रहा था और गांव में आजादी के एक सिपाही की अंतिम यात्रा निकल रही थी।

1932 में छह माह जेल, 100 रुपए जुर्माना

जवाहर सिंह का जीवन देश की आजादी के संघर्ष से जुड़ा रहा। उन्होंने 1932 के राष्ट्रीय आंदोलन में भाग लिया, जिसके चलते उन्हें छह माह का कारावास भुगतना पड़ा और 100 रुपए का जुर्माना भी लगाया गया। इसके बाद 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में भी उन्होंने सक्रिय योगदान दिया। नमक आंदोलन में भी उनकी भागीदारी रही।

आजादी के आंदोलन में संघर्ष करने वाले जवाहर सिंह ने स्वतंत्रता के बाद भी देश और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को हमेशा प्राथमिकता दी।

सम्मान निधि लेने से किया था इनकार

जवाहर सिंह की सोच उनके जीवन के अंतिम दौर तक देशहित से जुड़ी रही। शासन की ओर से स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के रूप में मिलने वाली सम्मान निधि को लेकर उन्होंने शुरुआत में इसे लेने से इनकार कर दिया था। उनका कहना था कि शासन की राशि जनहित, देशहित और समाज के काम आनी चाहिए।

बाद में उन्होंने सम्मान निधि इस अपेक्षा के साथ स्वीकार की कि उनके परिवार को भी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिवार के रूप में सम्मान और पहचान मिले। वे चाहते थे कि उनकी आने वाली पीढ़ियां भी स्वतंत्रता संग्राम की इस विरासत से जुड़ी रहें।

तीन बेटों के साथ रही सेनानी परिवार की विरासत

जवाहर सिंह के तीन पुत्र हैं—कमल नारायण सिंह, कमलाकर सिंह और प्रभाकर सिंह। परिवार के सदस्यों के अनुसार वे अपने पुत्रों और पोतों को स्वतंत्रता संग्राम की विरासत और मूल्यों से जोड़कर रखते थे।

जनप्रतिनिधियों ने पुष्पचक्र अर्पित कर दी श्रद्धांजलि

अंतिम संस्कार के दौरान सिरमौर विधायक दिव्यराज सिंह, राज्यसभा सांसद राजमणि सिंह पटेल, युवराज घनश्याम सिंह बसरेही, संचार निर्माण समिति अध्यक्ष प्रवल पाण्डेय, जवा तहसीलदार राजेश शुक्ला और अतरैला थाना प्रभारी विजय प्रताप सिंह सहित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

इसके बाद पुलिस जवानों की टुकड़ी ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी को अंतिम सलामी दी। बड़े पुत्र कमल नारायण सिंह ने मुखाग्नि दी।

हजारों ग्रामीणों ने दी अंतिम विदाई

जवाहर सिंह की अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। ग्रामीणों ने पुष्प अर्पित किए और अंतिम संस्कार में सप्त लकड़ी अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। पूरे वातावरण में देशभक्ति और गम का मिला-जुला माहौल रहा।

दिग्विजय सिंह से भी रहा संपर्क

जवाहर सिंह का सार्वजनिक जीवन में भी संपर्क रहा। वे मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के करीब संपर्क में रहे। स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान और सामाजिक जीवन में सक्रियता के कारण क्षेत्र में उनकी अलग पहचान रही।

आजादी के जश्न के बीच एक सेनानी की विदाई

15 अगस्त को देशभर में तिरंगा फहराया गया, राष्ट्रगान गूंजा और आजादी का जश्न मनाया गया। वहीं डोरी-भितरी में उसी दिन उस व्यक्ति की अंतिम यात्रा निकली, जिसने कभी इसी आजादी के लिए जेल की सजा भुगती थी।

जवाहर सिंह का अंतिम सफर केवल एक व्यक्ति की विदाई नहीं, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन की उस पीढ़ी को अंतिम सलाम था, जिसने देश की आजादी के लिए अपना वर्तमान दांव पर लगाया था।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button