अनुकंपा नियुक्ति के आवेदकों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत
Major relief for compassionate appointment applicants from the High Court.

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति के एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि यदि आश्रित ने निर्धारित अवधि में आवेदन कर दिया हो और विभाग ने उस पर प्रभावी निर्णय नहीं लिया, तो बाद में सरकारी विभाग अपनी ही प्रशासनिक चूक का लाभ उठाकर दावे को देरी के आधार पर खारिज नहीं कर सकता।
जस्टिस बिभु दत्ता गुरु ने सूरजपुर जिले की स्नेहलता गुप्ता की याचिका का निराकरण करते हुए अधिकारियों को उनकी शैक्षणिक योग्यता के अनुरूप स्वीकृत एवं रिक्त पद पर अनुकंपा नियुक्ति के दावे पर नियमानुसार विचार करने का निर्देश दिया।
याचिकाकर्ता सूरजपुर निवासी स्नेहलता गुप्ता पति स्वर्गीय शिवसागर गुप्ता के पति पंचायत विभाग में शिक्षा कर्मी ग्रेड-3 के पद पर कार्यरत थे। सेवा के दौरान 15 अप्रैल 2014 को उनका निधन हो गया था। पति की मृत्यु के बाद स्नेहलता ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए निर्धारित समय में आवेदन किया था।
7 साल बाद मिली आवेदन खारिज होने की सूचना
याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि कलेक्टर सूरजपुर के 11 दिसंबर 2024 के पत्र से पता चला कि उनका आवेदन कथित तौर पर 12 अगस्त 2014 को ही निरस्त कर दिया गया था। हालांकि, इस निर्णय की जानकारी उन्हें करीब सात वर्ष बाद 12 अगस्त 2021 के पत्र के माध्यम से दिए जाने की बात सामने आई। स्नेहलता का कहना था कि उन्हें ऐसा कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ। हाई कोर्ट के समक्ष यह भी सामने आया कि विभाग ने लंबे समय तक उनके दावे पर कोई प्रभावी निर्णय नहीं लिया और बाद में देरी का आधार लेकर उनके दावे को समाप्त करने की स्थिति बनाई।
हाई कोर्ट ने रिकार्ड और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद कहा कि जब याचिकाकर्ता ने निर्धारित अवधि में आवेदन किया था और उसके बाद भी अपने दावे के लिए प्रयास करती रही, तब अधिकारियों की ओर से लंबे समय तक प्रभावी निर्णय नहीं लेना उचित नहीं था। विभाग अपने निर्णय को प्रभावी ढंग से संप्रेषित नहीं करने की प्रशासनिक चूक का लाभ उठाकर बाद में याचिकाकर्ता के दावे को देरी के आधार पर खारिज नहीं कर सकता।
कोर्ट ने दिया शैक्षणिक योग्यता के अनुरूप पद पर विचार का निर्देश
स्नेहलता ने अपने दावे के लंबित रहने के दौरान वर्ष 2015 से 2017 तक दैनिक वेतनभोगी चपरासी के रूप में काम किया। उन्होंने 2017 में हायर सेकेंडरी परीक्षा उत्तीर्ण की और 2021 में डीएलएड की योग्यता हासिल की। उन्होंने समय-समय पर अधिकारियों के समक्ष अभ्यावेदन भी प्रस्तुत किए।
कोर्ट ने कहा कि यदि स्नेहलता उस पद के लिए पात्र नहीं थीं, जिसके लिए मूल आवेदन किया गया था, तब भी उनके दावे को अनिश्चितकाल तक लंबित रखना उचित नहीं था। उनकी शैक्षणिक योग्यता के अनुरूप किसी स्वीकृत एवं रिक्त पद पर नियुक्ति के दावे पर विचार किया जाना चाहिए था।



