छत्तीसगढ़

गरियाबंद में बच्चों की सुरक्षा कितनी सुरक्षित है…?

How secure is the safety of children in Gariaband...?

लोकेश्वर सिन्हा 

गरियाबंद में बच्चों की सुरक्षा कितनी सुरक्षित है…?

ये आप देख सकते है इस तस्वीर मे… जिले के कई निजी स्कूलों में फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है। हमारी पड़ताल और एसडीआरएफ के निरीक्षण में कई स्कूलों में एक्सपायरी फायर सिलेंडर, अधूरी सुरक्षा व्यवस्था और नियमों की अनदेखी सामने आई है। आइए देखते हैं यह खास रिपोर्ट…

वीओ-1,,, लखनऊ के दर्दनाक अग्निकांड के बाद जब गरियाबंद के निजी स्कूलों की पड़ताल की गई तो तस्वीर चौंकाने वाली निकली। कई स्कूलों में फायर सेफ्टी के नाम पर सिर्फ औपचारिकताएं पूरी होती नजर आईं। कहीं सिलेंडर महीनों पहले एक्सपायर मिले तो कहीं स्कूल बसों में भी एक्सपायरी फायर सिलेंडर लगे पाए गए।

वीओ-2,,, मजरकट्टा स्थित सीबीएसई द्रोणाचार्य पब्लिक स्कूल में लगे फायर सिलेंडर करीब एक साल पहले ही एक्सपायर हो चुके थे। इतना ही नहीं, स्कूल बसों में लगे सभी फायर सिलेंडर भी एक्सपायरी पाए गए। जबकि फायर विभाग पहले ही इन्हें बदलने के निर्देश दे चुका था। स्कूल में लगी फायर होज रील व्यवस्था भी अधूरी मिली।

वीओ-3,,, मालगांव स्थित शिवम कॉलेज ऑफ नर्सिंग में निर्माणाधीन भवन में विद्यार्थियों की पढ़ाई कराई जा रही है। पूरे कॉलेज परिसर में केवल दो फायर सिलेंडर मिले, जिन्हें हाल ही में रिफिल कराया गया था। लेकिन कॉलेज बसों में लगे फायर सिलेंडर एक्सपायर पाए गए। सवाल यह है कि किसी आपात स्थिति में क्या इतनी व्यवस्था पर्याप्त होगी?

वीओ-4,,, पारागांव स्थित राइजिंग स्टार इंग्लिश स्कूल में संचालक ने बताया कि स्कूल में पांच फायर सिलेंडर हैं, लेकिन सभी की वैधता समाप्त हो चुकी है। कुछ सिलेंडर तो दो से तीन साल पहले ही एक्सपायर हो चुके थे। सभी सिलेंडर एक ही स्थान पर रखे मिले, जबकि नियमों के अनुसार इन्हें अलग-अलग स्थानों पर लगाया जाना चाहिए।

वीओ-5,,, श्रद्धा पब्लिक स्कूल में फायर होज रील की व्यवस्था मौजूद मिली। वहीं कुछ फायर सिलेंडर वैध पाए गए, जबकि अधिकांश सिलेंडरों को रिफिलिंग के लिए भेजे जाने की जानकारी प्रबंधन ने दी। जिले में फायर सेफ्टी एनओसी प्राप्त करने वाला यह एकमात्र निजी स्कूल बताया गया।

 

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