500 की आबादी के रास्ते पर विवाद: ग्रामीण बोले- पुराना मार्ग बंद, सेन परिवार का आरोप- निजी खेत से जबरन रास्ता निकालने का दबाव
Dispute over access route for village of 500: Villagers say old path is closed; Sen family alleges pressure to forcibly carve out a path through private farmland.

रीवा मप्र रिपोर्टर सुभाष
छदहना में रास्ते को लेकर विवाद, निजी जमीन से रास्ता निकालने के आरोप-प्रत्यारोप
ग्रामीणों ने एसडीओ को ज्ञापन देकर रास्ता बहाल करने की मांग की, सेन परिवार ने कहा- पुराना रास्ता बंद कर निजी खेत पर दबाव बनाया जा रहा

जवा। तहसील क्षेत्र के ग्राम छदहना के टोला पूर्वी में रास्ते को लेकर विवाद अब प्रशासन की चौखट तक पहुंच गया है। एक ओर ग्रामीणों ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) जवा को ज्ञापन देकर खसरा नंबर 338 एवं 350 से जुड़े रास्ते को बहाल कराने की मांग की है, वहीं दूसरी ओर संबंधित सेन परिवार ने जमीन को अपनी निजी कृषि भूमि बताते हुए आरोप लगाया है कि उनकी जमीन के बीच से जबरन रास्ता निकालने का दबाव बनाया जा रहा है। मामले में दोनों पक्षों के दावों के बीच अब राजस्व रिकॉर्ड और मौके की स्थिति की जांच महत्वपूर्ण हो गई है।

ग्रामीणों द्वारा दिए गए ज्ञापन के अनुसार छेंदना के टोला पूर्वी में करीब 500 लोगों की आबादी है। जवा से जुड़ने वाले मुख्य मार्ग तक पहुंचने के लिए करीब 300 फीट भूमि से होकर आवागमन होता है। ग्रामीणों का दावा है कि खसरा नंबर 338 और 350 में वर्ष 1995-96 तथा 1996-97 के राजस्व अभिलेखों में रास्ता दर्ज था। उनका आरोप है कि कंप्यूटरीकृत खसरे में खसरा नंबर 350 में रास्ता दर्ज है, जबकि खसरा नंबर 338 में रास्ता निरंक कर दिया गया है।

रास्ता बंद करने का आरोप, पुलिस ने खुलवाया था मार्ग
ज्ञापन में ग्रामीणों ने बताया कि खसरा नंबर 338 के बंटवारे के बाद मार्ग 338/2 से होकर गुजरता था। आरोप है कि मई-जून 2026 में रास्ते की भूमि पर जुताई कर खाई खोदकर तारबंदी कर दी गई, जिससे आवागमन बंद हो गया। ग्रामीणों के अनुसार 112 नंबर पर शिकायत के बाद पनवार पुलिस मौके पर पहुंची और तार हटवाकर रास्ता खुलवाया।
ग्रामीणों ने बताया कि मामले को लेकर 29 मई को तहसीलदार जवा और 2 जून को कलेक्टर रीवा को आवेदन दिया गया था। इसके बाद 23 जून को तहसीलदार कार्यालय में खसरा सुधार एवं रास्ता बहाल कराने के लिए आवेदन भी पंजीबद्ध कराया गया, लेकिन उनका कहना है कि अभी तक स्थायी समाधान नहीं हुआ।
सेन परिवार का पक्ष- जमीन निजी, 1959 से रास्ता दर्ज नहीं
वहीं संबंधित सेन परिवार ने ग्रामीणों के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा है कि खसरा नंबर 338 उनकी निजी कृषि भूमि है और वर्ष 1959 से लेकर अब तक यह जमीन आम रास्ते के रूप में दर्ज नहीं रही है। परिवार का कहना है कि गांव में पहले से मौजूद पुराने रास्ते को बंद कर दिया गया है और अब उनकी निजी जमीन के बीच से रास्ता निकालने का दबाव बनाया जा रहा है।
परिवार के अनुसार पुराना रास्ता पूर्व सरपंच के पति गंगा सिंह पटेल के घर के बगल से होकर जाता था। परिवार ने प्रशासन से मौके पर जाकर रास्ते की वास्तविक स्थिति देखने और आसपास रहने वाले लोगों से भी जानकारी लेने की मांग की है।
खेत के किनारे से रास्ता देने को तैयार होने का दावा
सेन परिवार का कहना है कि गांव के लोगों को परेशानी न हो, इसलिए वे अपनी निजी जमीन के एक किनारे से रास्ता देने को तैयार हैं। परिवार का आरोप है कि इसके बावजूद कुछ लोग खेत के बीच से रास्ता लेने पर अड़े हुए हैं। परिवार ने प्रशासन से राजस्व रिकॉर्ड और मौके की स्थिति के आधार पर निर्णय लेने की मांग की है।
परिवार का यह भी आरोप है कि खेती के लिए की गई फेंसिंग को कई बार ट्रैक्टर चलाकर तोड़ा गया। उनका कहना है कि पुलिस और प्रशासन से शिकायत के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका और इस विवाद के कारण इस वर्ष खेती प्रभावित हुई है।
मारपीट के आरोप से मामला और गंभीर
रास्ते के विवाद के बीच सेन परिवार ने 3 अगस्त की शाम मारपीट की घटना का भी आरोप लगाया है। परिवार के अनुसार करीब छह लोग घर में घुसे और बुजुर्ग पिता अच्छे लाल, उनके बेटे लालमणि तथा बहू के साथ मारपीट की। परिवार का दावा है कि मामले में 4 अगस्त को पनवार थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है। परिवार ने मामले की जानकारी पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को दिए जाने की बात भी कही है।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि पुलिस या प्रशासन के स्तर से होना बाकी है। वहीं परिवार का कहना है कि महिला के न्यायालय में बयान दर्ज होने हैं और उन्हें पुलिस कार्रवाई की उम्मीद है।
कब्जे और शराब बिक्री के भी आरोप
सेन परिवार ने अपनी निजी भूमि खसरा नंबर 338 एवं 336 पर कुछ लोगों द्वारा कब्जा किए जाने का आरोप भी लगाया है। परिवार के अनुसार इस संबंध में राजस्व न्यायालय में मामला चल रहा है।
इसके अलावा परिवार ने गांव में कुछ लोगों द्वारा खुलेआम शराब बेचने और शराब के नशे में विवाद एवं मारपीट करने के आरोप भी लगाए हैं। इन आरोपों की भी पुलिस जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
प्रशासन की जांच से सामने आएगी वास्तविक स्थिति
मामले में दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं। ग्रामीण जहां पुराने राजस्व रिकॉर्ड में रास्ता दर्ज होने का दावा कर रहे हैं, वहीं सेन परिवार जमीन को निजी बताते हुए जबरन रास्ता निकालने का आरोप लगा रहा है। ऐसे में खसरा रिकॉर्ड, पुराने राजस्व अभिलेख, मौके की नाप-जोख और पुराने रास्ते की वास्तविक स्थिति की जांच से ही विवाद का समाधान संभव है।
ग्रामीणों और सेन परिवार दोनों ने प्रशासन से मौके का निरीक्षण कर निष्पक्ष जांच कराने और विवाद का स्थायी समाधान करने की मांग की है। अब निगाहें राजस्व विभाग की जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं।



