भाजपा सरकार में विकास के नाम पर भ्रष्टाचार और अफसरशाही हावी: प्रबल पाण्डेय
Corruption and bureaucracy dominate under the BJP government in the name of development: Prabal Pandey

रीवा मप्र| रिपोर्टर सुभाष मिश्रा
सत्ता पक्ष के विधायक को समस्याओं के निराकरण के लिए अनशन पर बैठना पड़ रहा, यह दुर्भाग्यपूर्ण — जनपद सदस्य
जवा। जवा जनपद के जनपद सदस्य एवं युवा समाजसेवी प्रबल पाण्डेय ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सिरमौर विधानसभा के तराई अंचल की मूलभूत समस्याओं को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र में विकास के दावों के बावजूद बिजली, पानी, सड़क, नाली और आवारा पशुओं जैसी समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। उनके मुताबिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार और अफसरशाही का बोलबाला है।
प्रबल पाण्डेय ने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि समस्याओं के समाधान के लिए सत्ता पक्ष के विधायक को ही अनशन पर बैठना पड़ रहा है। उन्होंने इसे सरकार और प्रशासन के लिए दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति बताया।
रीवा-डभौरा मार्ग की हालत पर सवाल
उन्होंने रीवा से डभौरा सड़क मार्ग की खराब स्थिति का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इस मार्ग से सफर करने में आम लोगों को 2 से 3 घंटे तक लग रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सड़क की मरम्मत के लिए जारी बजट का उचित उपयोग नहीं हुआ और कागजों में सड़क सुधार दिखा दिया गया। उन्होंने संबंधित ठेकेदार के भाजपा से जुड़े होने का भी आरोप लगाया।
बाजारों में गंदगी और पुल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
पाण्डेय ने जवा, अतरैला और पटेहरा बाजारों में पानी निकासी और साफ-सफाई की व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पटेहरा नदी पर बने पुल में सुरक्षा जाली की व्यवस्था अब तक नहीं की गई है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।
उन्होंने NCC कंपनी द्वारा सड़क खोदने के बाद रास्तों की बदहाल स्थिति का भी आरोप लगाया और कहा कि इससे आम लोगों की परेशानी बढ़ी है।
गौशालाओं की व्यवस्था पर भी उठाए सवाल
जवा क्षेत्र की गौशालाओं को लेकर उन्होंने आरोप लगाया कि तीन-चार गौशालाओं को छोड़ दें तो अधिकांश व्यवस्थाएं केवल कागजों तक सीमित हैं। कई गौशालाएं अधूरी पड़ी हैं। उन्होंने प्रशासन से जमीनी स्तर पर निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की।
बिजली और तहसील-जनपद की कार्यप्रणाली पर आरोप
प्रबल पाण्डेय ने तराई क्षेत्र में अघोषित बिजली कटौती और मनमाने बिजली बिलों का आरोप लगाते हुए व्यवस्था में सुधार की मांग की। साथ ही तहसील और जनपद कार्यालयों में आम लोगों को काम के लिए बार-बार चक्कर लगाने पड़ने का आरोप लगाया।
उन्होंने दावा किया कि बिना पैसे लिए काम नहीं होने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। जनपद कार्यालय के आसपास सफाई व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि सफाई के नाम पर कई बार राशि खर्च होने के बावजूद कार्यालय के आसपास गंदगी दिखाई देती है।
प्रबल पाण्डेय ने कहा कि सरकार को विकास के दावों के बजाय जमीनी समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए और प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही तय करनी चाहिए।



