छत्तीसगढ़

‘सांवला और मोटा’ कहने से नहीं मिलेगा तलाक, हाईकोर्ट की दो टूक

Calling yourself 'dark and fat' won't grant you divorce, says High Court

बिलासपुर। जांजगीर-चांपा जिले के चांपा निवासी 28 वर्षीय आकाश घोष की पत्नी 25 वर्षीय पूजा सीत से तलाक की मांग हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। पति ने पत्नी पर उसे सांवला और मोटा कहकर अपमानित करने, क्रूरता और बिना उचित कारण अलग रहने का आरोप लगाते हुए हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13 के तहत तलाक मांगा था।

जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच ने 18 सितंबर 2026 को फैसला सुनाते हुए परिवार न्यायालय, जांजगीर के 28 अगस्त 2024 के निर्णय को बरकरार रखा। कोर्ट ने कहा कि पति पत्नी की ओर से क्रूरता और परित्याग के जरूरी तत्वों को ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य से साबित नहीं कर सका।

शादी के दो-तीन महीने बाद ही शुरू हुआ विवाद

आकाश और पूजा का विवाह 7 मार्च 2019 को चांपा में हिंदू रीति-रिवाज से हुआ था। पति के अनुसार पत्नी करीब दो-तीन महीने ही उसके और परिवार के साथ रही। इसके बाद दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया।

पति का आरोप था कि पत्नी उससे गलत व्यवहार करती थी, झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देती थी और बार-बार मायके चली जाती थी। वह रिश्तेदार की शादी में राजस्थान भी गई और करीब 25 दिन बाद लौटी। इसके बाद उसके गर्भ में जुड़वां बच्चों का गर्भपात होने की बात भी रिकॉर्ड में आई। पति के मुताबिक पत्नी की मां उसे इलाज के लिए रायगढ़ ले गई और उसके बाद पत्नी वापस चांपा नहीं लौटी।

पत्नी ने पति पर दूसरी महिला से संबंध का लगाया आरोप

पूजा ने पति के आरोपों से इनकार किया। उसका कहना था कि पति का दूसरी महिला से संबंध था। इस बात की जानकारी होने के बाद वह शराब का सेवन करने लगा और उसके साथ दुर्व्यवहार करता था।

उसने आरोप लगाया कि गर्भावस्था के दौरान भी पति ने उसकी उचित देखभाल और इलाज नहीं कराया। बीमारी के दौरान उसकी मां उसे इलाज के लिए रायगढ़ ले गई। ठीक होने के बाद उसने पति और ससुराल वालों से उसे वापस ले जाने का अनुरोध किया, लेकिन वे उसे लेने नहीं आए। पूजा की मां ने 24 फरवरी 2020 को रायगढ़ एसपी के समक्ष शिकायत भी दी थी। पूजा ने रायगढ़ में घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू की, जो अभी लंबित है।

पत्नी को वापस लाने के प्रयास का दावा

आकाश का कहना था कि उसने पत्नी को वापस लाने के कई प्रयास किए। उसने 5 नवंबर 2019 को जांजगीर काउंसिलिंग सेंटर में संपर्क किया और 16 दिसंबर 2019 को समाज के लोगों के साथ रायगढ़ जाकर पत्नी को वापस लाने की कोशिश की। बाद में पत्नी की ओर से पति और उसके परिवार के खिलाफ घरेलू हिंसा की कार्रवाई शुरू की गई, जो रायगढ़ न्यायालय में लंबित है। इन परिस्थितियों को आधार बनाकर आकाश ने पत्नी के खिलाफ क्रूरता और परित्याग साबित करते हुए तलाक की मांग की थी, जिसे परिवार न्यायालय ने 28 अगस्त 2024 को खारिज कर दिया था।

हाईकोर्ट ने कहा- आरोप बहुत, लेकिन ठोस साक्ष्य नहीं

डिवीजन बेंच ने पक्षकारों के बयान और रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों का विस्तृत परीक्षण किया। कोर्ट ने पाया कि पति ने पत्नी के खिलाफ कई आरोप लगाए, लेकिन उन्हें साबित करने के लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य पेश नहीं किए।

पति की ओर से यह आरोप भी लगाया गया था कि पत्नी उसे सांवला और मोटा कहकर अपमानित करती थी। हाईकोर्ट ने कहा कि इस तरह के कथित व्यवहार को इस मामले की परिस्थितियों में तलाक देने के लिए पर्याप्त क्रूरता नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हिंदू विवाह अधिनियम के तहत क्रूरता और परित्याग को साबित करने के लिए विश्वसनीय और ठोस प्रमाण जरूरी हैं, जो इस केस में पेश नहीं किए गए। इसी आधार पर कोर्ट ने परिवार न्यायालय के फैसले को सही ठहराते हुए पति की अपील खारिज कर दी।

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