छत्तीसगढ़

पूर्व नक्सली कमांडर सुनील और उनके 10 साथियों ने आज समाज की मुख्यधारा में लौटकर रक्तदान करने वाले लोगो का हौसला बढ़ाया

Former Naxalite commander Sunil and his 10 comrades returned to mainstream society today to encourage blood donors.

रिपोर्टर लोकेश्वर सिन्हा 

लोकेशन गरियाबंद

गरियाबंद जिले का मालगांव आज एक बड़े सामाजिक बदलाव का गवाह बना, जहां कभी घने जंगलों में बंदूक थामने वाले पूर्व नक्सली कमांडर सुनील और उनके 10 साथियों ने आज समाज की मुख्यधारा में लौटकर रक्तदान करने वाले लोगो का हौसला बढ़ाया मौका था समाजसेवी भीम निषाद का जन्मदिन, जिनके सेवा भाव ने इन पूर्व नक्सलियों का हृदय परिवर्तन कर दिया है। दरअसल यह बदलाव उस वक्त शुरू हुआ जब सुनील की पत्नी बीमार थीं और उन्हें रक्त की सख्त जरूरत थी। उस कठिन समय में भीम निषाद ने रक्तदान कर उनकी जान बचाई थी। इस निस्वार्थ मदद ने सुनील को इतना प्रभावित किया कि उन्होंने मालगांव में आज हुए रक्तदान शिविर में अपने 10 साथियों के साथ रक्तदाताओं का हौसला बढ़ाने पहुंचे ,आज वे भीम निषाद के साथ कंधे से कंधा मिलाकर मानवीय कार्यों में जुटे हैं। हालांकि किसी कारणवश वे अभी रक्तदान नहीं कर पाए मगर आगे चलकर वे रक्तदान जरुर करेंगे ऐसा सुनील ने कहा,

मालगांव जिसे अब रक्तदाताओं का गांव कहा जाता है, वहां आयोजित इस शिविर में 120 से अधिक लोगों ने रक्तदान किया। कस ग्राम के निवासी चैंपेश्वर ध्रुव जो एक एक्सीडेंट के बाद दिव्यांग हो चुके हैं वह अब तक 21 बार ब्लड दे चुके हैं और आज 22वीं बार ब्लड देने के लिए आए ऐसे ही एक दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए दशपुर के सरपंच नरेंद्र ध्रुव ने भी आज रक्तदान किया। भीम निषाद पिछले 5-6 वर्षों में 5 हजार से अधिक लोगों के लिए रक्त की व्यवस्था कर चुके हैं और हर साल औसतन 1 हजार जरूरतमंदों की जान बचा रहे हैं। उनके आह्वान पर आज पूरा मालगांव, बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, रक्त की कमी से जूझ रहे अपरिचितों के लिए ढाल बनकर खड़ा है। भीम निषाद अपने जन्मदिन पर हर साल रक्तदान शिविर का आयोजन तो करते ही है आज उन्होंने अपने गांव की समस्या को देखते हुए एक एंबुलेंस भी गांव को दान की इससे वह गांव में कि जरूरतमंद लोगों को निशुल्क रूप से उपलब्ध कराएंगे ।

 

 

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