मध्यप्रदेश

ग्रामीणों ने लकड़ी और रस्सी से बनाया पुल: जान जोखिम में डालकर स्कूल जाते हैं बच्चे, वर्षों से पक्के पुल की मांग

Villagers build bridge using wood and rope; children risk their lives to go to school; demand for a concrete bridge persists for years.

लोकेशन – रीवा मप्र रिपोर्टर सुभाष मिश्रा 

बरदाहा घाटी के नीचे बसे रौली के मुसलहा टोला में नदी पार करने का यही सहारा, प्रशासन से कई बार गुहार के बाद भी नहीं बना पुल

रीवा जिले की जवा तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत रौली के मुसलहा टोला में आज भी ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं के अभाव में अपनी जान जोखिम में डालकर आवागमन करने को मजबूर हैं। नदी पर पक्का पुल नहीं बनने से परेशान ग्रामीणों ने श्रमदान कर लकड़ियों, बांस और रस्सियों की मदद से अस्थायी पुल तैयार कर लिया है। इसी पुल के सहारे बच्चे स्कूल जाते हैं, किसान खेतों तक पहुंचते हैं और महिलाएं व बुजुर्ग रोजमर्रा के कार्यों के लिए नदी पार करते हैं।

ग्रामीणों के अनुसार बरदाहा घाटी के नीचे बसे इस गांव के पास से टोंस परियोजना का पानी गुजरता है। पहले बरसात के दिनों में ही नदी पार करने में परेशानी होती थी, लेकिन परियोजना का पानी लगातार बहने से अब पूरे वर्ष यह समस्या बनी रहती है। यदि इस पुल का उपयोग न किया जाए तो मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए 15 से 20 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ता है।

 

गांव वालों ने खुद तैयार किया पुल

 

बार-बार प्रशासन से पक्का पुल बनाने की मांग के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला तो ग्रामीणों ने अपने-अपने घरों से लकड़ियां और बांस इकट्ठा किए। सभी ने मिलकर नदी पर अस्थायी पुल तैयार किया। कई बार बरसात में यह पुल बह चुका है, जिसके बाद ग्रामीणों ने फिर से इसे बनाया। लोगों की सुरक्षा के लिए किनारों पर लोहे की सरिया भी लगाई गई है।

 

हर दिन हादसे का खतरा

 

लकड़ी का यह पुल अब काफी कमजोर हो चुका है। पुल से गुजरते समय वह हिलता रहता है, जिससे हर समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। ग्रामीण बताते हैं कि कई बार लोगों के पैर लकड़ियों के बीच फंस चुके हैं और छोटे-मोटे हादसे भी हो चुके हैं। इसके बावजूद मजबूरी में इसी पुल से रोजाना आवागमन करना पड़ता है।

 

बच्चों और महिलाओं के लिए सबसे बड़ी परेशानी

 

ग्रामीणों का कहना है कि स्कूली बच्चे प्रतिदिन इसी पुल से होकर स्कूल जाते हैं। महिलाएं छोटे बच्चों को गोद में लेकर नदी पार करती हैं। किसान साइकिल और दोपहिया वाहन भी इसी पुल से निकालते हैं। पुल पार करते समय हर किसी के मन में हादसे का डर बना रहता है।

 

स्थानीय ग्रामीण राजेश साकेत ने बताया कि कई वर्षों से प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से पक्का पुल बनाने की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। मजबूरी में गांव वालों ने स्वयं लकड़ी का पुल बनाया।

 

वहीं रामबाबू कोल का कहना है कि बरसात में इस पुल से गुजरना बेहद खतरनाक हो जाता है। यदि जल्द पक्का पुल नहीं बना तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

 

प्रशासन ने दिया कार्रवाई का आश्वासन

 

मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया है। रीवा कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने कहा कि संबंधित अधिकारियों को मौके का निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि ग्रामीण इस प्रकार की समस्या से जूझ रहे हैं तो उसका शीघ्र समाधान कराया जाएगा और पक्का पुल निर्माण की दिशा में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

 

ग्रामीणों का कहना है कि विकास के दावों के बीच उनका गांव आज भी एक अदद पुल का इंतजार कर रहा है। उनका आग्रह है कि किसी बड़े हादसे से पहले प्रशासन स्थायी समाधान सुनिश्चित करे।

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