बीएमडीसी में “एंटरप्राइज रिस्क मैनेजमेंट सुदृढ़ीकरण” पर दो-दिवसीय प्रबंधन विकास कार्यक्रम
Two-day Management Development Programme on “Strengthening Enterprise Risk Management” at BMDC

सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र के एचआर–एल एंड डी विभाग द्वारा भिलाई मैनेजमेंट डेवलपमेंट सेंटर (बीएमडीसी) में 26–27 फरवरी 2026 को “एंटरप्राइज रिस्क मैनेजमेंट सुदृढ़ीकरण” विषय पर दो-दिवसीय प्रबंधन विकास कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), रायपुर के फैकल्टी सहयोग से सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य बढ़ती वैश्विक, आर्थिक एवं तकनीकी अनिश्चितताओं के परिप्रेक्ष्य में संगठन की रणनीतिक जोखिम तैयारी को सुदृढ़ करना तथा संस्थागत लचीलेपन को मजबूत बनाना था। कार्यक्रम में सेल की विभिन्न इकाइयों से कुल 23 वरिष्ठ अधिकारियों ने सहभागिता की।
उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित भिलाई इस्पात संयंत्र के कार्यपालक निदेशक (मानव संसाधन) श्री पवन कुमार ने संबोधन में कहा कि सतत विकास, नियमकीय अनुपालन तथा रणनीतिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए संरचित, सक्रिय एवं दूरदर्शी जोखिम प्रबंधन प्रणाली अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने इस प्रकार के कार्यक्रमों को भविष्य उन्मुख नेतृत्व निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
महाप्रबंधक (ईआरएम एवं एसडीजी) एवं मुख्य जोखिम अधिकारी, सेल कॉर्पोरेट कार्यालय, डॉ. गीता शर्मा ने कार्यक्रम की पृष्ठभूमि प्रस्तुत करते हुए एंटरप्राइज रिस्क मैनेजमेंट को सुशासन ढांचे, व्यवसाय निरंतरता योजना तथा दीर्घकालिक कॉर्पोरेट रणनीति से समेकित रूप से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। आईआईएम रायपुर के प्रो. राजीव ए ने उद्घाटन सत्र में संरचित जोखिम पहचान, विश्लेषण एवं प्रभावी रिपोर्टिंग तंत्र की महत्ता को रेखांकित किया।
कार्यक्रम के तकनीकी सत्र आईआईएम रायपुर के प्राध्यापकों द्वारा संचालित किए गए। प्रो. राजीव ए एवं प्रो. प्रणीत कुमार रॉय ने जोखिम पहचान ढांचे, सेबी एलओडीआर विनियमों एवं कंपनी अधिनियम के प्रावधानों, मात्रात्मक जोखिम मूल्यांकन पद्धतियों तथा वित्तीय एवं परियोजना जोखिम प्रबंधन पर विस्तार से चर्चा की।
द्वितीय दिवस के सत्रों में उभरते एवं जटिल जोखिमों पर विशेष फोकस किया गया। प्रो. जितिन पी ने भू-आर्थिक एवं भू-राजनीतिक जोखिमों के वैश्विक प्रभावों पर विचार साझा किए। प्रो. जितेश ए ने साइबर सुरक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी जोखिम एवं व्यवसाय निरंतरता योजना पर व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। प्रो. संदीप एस ने सुशासन एवं रणनीतिक जोखिम प्रबंधन पर चर्चा करते हुए संगठनात्मक जोखिम स्वीकार्यता को दीर्घकालिक कॉर्पोरेट लक्ष्यों के साथ समन्वित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
समापन सत्र के दौरान मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित मुख्य महाप्रबंधक एंड एसीवीओ (सतर्कता) श्री सुनील सिंघल ने इस पहल की सराहना करते हुए नैतिक सतर्कता, पारदर्शिता एवं सुदृढ़ जोखिम शासन प्रणाली की आवश्यकता पर बल दिया।
उद्घाटन सत्र के दौरान धन्यवाद ज्ञापन महाप्रबंधक प्रभारी एवं विभागाध्यक्ष (एचआर–एल एंड डी) श्री संजीव श्रीवास्तव द्वारा प्रस्तुत किया गया वहीं महाप्रबंधक (एचआर–एल एंड डी) श्री सौरभ वर्ष्णेय ने समापन सत्र पर धन्यवाद ज्ञापन दिया। कार्यक्रम का संचालन उप प्रबंधक (एचआर–एल एंड डी) श्री जोजन जोस ने किया तथा समन्वय श्री श्रवण सिंह पुरोहित द्वारा किया गया।



