अवैध रेत का परिवहन धड़ल्ले से जारी , प्रशासन बना मूकदर्शक

देवभोग @ देवीचरण ठाकुर। ब्लॉक के ग्राम करचिया नदी पर रेत की खदान के लिए अनुबंध हुआ था, इस सत्र की अनुबंध की अंतिम तिथि रेत ढुलाई हेतु 15 जून था। इसके वावजूद रेत की ढुलाई उस घाट पर बंद हुई। लेकिन कुम्हड़ई और करलागुड़ा नदी से लगातार रेत की ढुलाई जारी है।
जानकारी अनुसार माह अक्टूबर नवंबर में रेत की खदान चालू होकर जून में मानसून आगमन पश्चात रेत खदान बंद हो जाता है। इस सत्र में जिस फर्म का रेत खदान का अनुबंध था, उस फर्म के द्वारा खदान से ढुलाई बंद करवा दिया गया है, लेकिन कुछ टैक्टर मालिको के हौसले बुलंद है जो देर रात के रेती की ढुलाई करते नजर आ रहे है। पिछले दिनों रेती से भरी 1 टैक्टर को रुक के पूछा गया तो ड्राइवर ने कहा कि रेत की ढुलाई लगातार जारी है। हम तो ड्राइवर है मालिक जहां का ऑर्डर देता है वहां हम छोड़ देते है। हमारे सवाल पर ड्राइवर ने कहा की रात के अंधेरे में रेत का परिवहन किया जाता है एवं देवभोग के राजापारा में डंप किया जाता है साथ ही ऑर्डर आने पर प्रति ट्रिप 2 हजार रुपया लोकल देवभोग में व आसपास का उससे अधिक में बेचा जाता है, वही इस रेत के खेल में खनिज विभाग भी कार्यवाही करने से बच रहा है। खनिज विभाग की हमेशा यही दलील होती है कि जिला मुख्यालय से देवभोग की दूरी अधिक होने के नाम पर विभाग गस्त नही कर पाता है एवं स्थानीय राजस्व विभाग पर कार्यवाही करने के लिए टकटकी निगाहें देखते रहती है जबकि स्थानीय राजस्व विभाग भी अब तक कोई बड़ी कार्यवाही नही कर रहा है। आलम यह है कि रेत तस्करों के हौसले बुलन्दी पर है रेत के अवैध खनन से राजस्व हानि तो हो रहा है, लेकिन इससे कहीँ न कहीँ छत्तीसगढ़ सरकार की छबि धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है, इससे साफ तस्वीर यह हैं कि रेत के अवैध परिवहन का खेल कब तक चलेगा यह देखने वाला बात है। इस संबंध में जब जिला खनिज अधिकारी से फोन के माध्यम से संपर्क करना चाहा उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।



