रिपोर्टर : सुभाष मिश्रा
रीवा। सीन आफ क्राइम यूनिट की रीजनल लैब जल्द शुरू होने वाली है। विभाग द्वारा इसके विधिवत संचालन की प्रक्रिया की जा रही है और यहां पर स्टाफ की पदस्थापना कर दी गई है। आवश्यक संसाधनों को भी कार्यालय में उपलब्ध करवाया जा रहा है, जिसके बाद से यहां विधिवत कामकाज शुरू हो जाएगा।
पुलिस लाइन में सीन आफ क्राइम की यूनिट रीजनल लैब का निर्माण कार्य कराया गया है। तीन माह पूर्व भवन बनकर तैयार हो गया है और अब इस लैब में काम संचालन शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है। यहां पर तीन वैज्ञानिक अधिकारियों की पदस्थापना की गई है, जिनमें दो सागर लैब से डॉ. प्रभाकर शर्मा व रीतेश शुक्ला आए है, जबकि एक सतना के वैज्ञानिक अधिकारी महेन्द्र सिंह को रीजनल लैब में पदस्थ किया गया है। इसके अतिरिक्त टेक्निीशियन व अटेंडेंट की पदस्थापना भी की गई है। अब यहां पर विभागीय अधिकारी आवश्यक संसाधन उपलब्ध करवाने का प्रयास कर रहे है जो जल्द पूरा हो जाएगा। संसाधन उपलब्ध होते ही लैब में विधिवत कामकाज शुरू हो जाएगा।
दरअसल रीजनल लैब के संचालन के बाद रीवा व शहडोल संभाग के पुलिस थानों को लाभ मिलेगा। अभी तक सारे जांच सागर भेजी जाती थी, जहां अत्यधिक काम का दबाव होने की वजह से रिपोर्ट मिलने में लंबा समय लग जाता था और तब तक थानों के मामले लंबित रहते थे। अब दोनों संभागों के प्रकरणों का निराकरणों की जांच रीजनल लैब में होगी, जिससे रिपोर्ट जल्दी मिल जाएगी और मामलों का निराकरण भी जल्द हो सकेगा।
सुनीता तिवारी बनी एफएसएल यूनिट की वैज्ञानिक अधिकारी :
एफएसएल यूनिट की वैज्ञानिक अधिकारी के रूप में जबलपुर से सुनीता तिवारी का स्थानांतरण रीवा के लिए किया गया है। 30 जून को एफएसएल के वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. आरपी शुक्ला के सेवानिवृत्त हेाने के बाद यह पद खाली पड़ा हुआ था जिस पर सुनीता तिवारी की पदस्थापना की गई है।
ये होगी जांचे :
रीजनल लैब में फिलहाल टाक्सोलाजी व सिरोलाजी की जांच होगी। टाक्सोलाजी में बिसरा का परीक्षण यहां पर किया जाएगा। वहीं टाक्सोलाजी में ब्लड, सीमन, बाल की जांच की जाए\गी। संदिग्ध मौत, हत्या जैसे प्रकरणों में इनकी जांच की जाती है। बाद में यहां पर जांचों का दायरा बढ़ाया जायेगा जिसमें डीएनए सहित अन्य जांचे भी करवाई जाएगी। बलात्कार के प्रकरणों में डीएनए परीक्षण कराया जाता है जो आरोपी के खिलाफ न्यायालय में अहम साक्ष्य होता है।
रीवा जिले से जाते है आधा सैकड़ा से अधिक प्रकरण :
जिले के विभिन्न थानों से हर माह आधा सैकड़ा से अधिक प्रकरण की जांच के लिए सागर लैब भिजवाए जाते है। इसमें मर्ग, आत्म, हत्या सहित अन्य मामलों के बिसरा जांच के लिए भेजे जाते है। इसके अतिरिक्त घटनास्थल में मिले रक्त के नमूने, बाल, सीमन सहित अन्य सेम्पल भी अलग-अलग प्रकरणों में जब्त किये जाते है जिनकी संबंधित मामलों में जांच की जाती है।
