छत्तीसगढ़

तीन दोषियों को फांसी, पीड़ित परिवार को मिला न्याय

Three convicts hanged; victim's family gets justice.

रायपुर/सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर के बहुचर्चित मां-बेटी हत्याकांड में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने मुख्य आरोपी कुलदीप साहू समेत तीन दोषियों को फांसी और चौथे दोषी आर्यन विश्वकर्मा को मरते दम तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

फैसला वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनाया गया। इस दौरान कुलदीप डरा हुआ नजर आया। सजा के ऐलान के बाद पुलिस परिवार ने दिवाली मनाई। इस दौरान पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों ने दीप जलाए और पटाखे फोड़े।

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मां-बेटी के साथ किया गया अमानवीय, नृशंस और वीभत्स अपराध माफी के लिए नहीं है। मुख्य आरोपी कुलदीप साहू के कोर्ट से बाहर निकलते समय किए गए ‘स्माइली जेस्चर’ पर भी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि आरोपी के व्यवहार में पश्चाताप नहीं दिखा और वह समाज में वापस लौटने के लायक नहीं है।

बेटी की तस्वीर के साथ पिता का भावुक संदेश

पीड़ित पिता ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लिखा- लंबे दुख के समय के बाद अंधेरे में एक न्याय की लौ ने जीवन का नया संदेश दिया है। माननीय कोर्ट के फैसले ने यह साबित किया है कि न्याय जिंदा है और ऐसे दुर्दांत अपराधियों की सजा कानून में तय है।

आप सभी लोगों का आभार जिन्होंने इस न्याय की लड़ाई में मेरा साथ दिया, उन सभी का भी आभार जिन्होंने इतने मुश्किल समय में भी मेरे खिलाफ षड्यंत्र और चालबाजी की। अभी मुझे कोर्ट के फैसले को उसके अंजाम तक पहुंचाने के लिए लंबी लड़ाई लड़नी है।

जेल अधीक्षक अक्षय सिंह राजपूत के मुताबिक, मां-बेटी हत्याकांड में सजा सुनाए जाने के दौरान मुख्य आरोपी कुलदीप साहू डरा हुआ नजर आया। अंबिकापुर केंद्रीय जेल में बंद कुलदीप को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत के फैसले की जानकारी दी गई।

कुछ दिन पहले दूसरे मामले में 10 साल की सजा मिलने के बाद कुलदीप कोर्ट से बाहर निकलते समय मुस्कुराता दिखा था। उसका वीडियो भी सामने आया था। लेकिन मां-बेटी की हत्या और दुष्कर्म के मामले में फांसी की सजा मिलने के दौरान वह डरा हुआ नजर आया।

आरोपियों को रायपुर सेंट्रल जेल लाया जाएगा

मामले की सुनवाई और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने चारों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई। आरोपियों को अब रायपुर सेंट्रल जेल शिफ्ट किया जाएगा, क्योंकि छत्तीसगढ़ में फांसी देने की व्यवस्था सिर्फ रायपुर जेल में है।

घटना 13 अक्टूबर 2024 की है। सूरजपुर थाने में पदस्थ प्रधान आरक्षक की पत्नी और उनकी 12 वर्षीय बेटी की हत्या कर दी गई थी। वारदात से पहले महिला के साथ दुष्कर्म किया गया था। इसके बाद मां-बेटी के शव घर से करीब पांच किलोमीटर दूर फेंक दिए गए थे।

घटना 13 अक्टूबर 2024 की है। सूरजपुर थाने में पदस्थ प्रधान आरक्षक की पत्नी और उनकी 12 वर्षीय बेटी की हत्या कर दी गई थी। वारदात से पहले महिला के साथ दुष्कर्म किया गया था। इसके बाद मां-बेटी के शव घर से करीब पांच किलोमीटर दूर फेंक दिए गए थे।

बेटी पर 28, मां पर 33 बार किया चाकू से वार

मामले की जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के मुताबिक, बच्ची के शरीर पर चाकू से 28 वार किए गए थे, जबकि उसकी मां पर 33 बार वार किया गया था। जांच में आरोपियों के फिंगरप्रिंट और कपड़ों पर मिले खून के नमूनों को अहम साक्ष्य माना गया। डीएनए जांच से महिला के साथ रेप की पुष्टि हुई थी। जांच में बच्ची के साथ भी दुष्कर्म की पुष्टि होने की बात सामने आई थी।

29 सितंबर को चारों आरोपियों को ठहराया था दोषी

फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 29 सितंबर 2026 को कुलदीप साहू समेत चारों आरोपियों को हत्या, रेप और पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी ठहराया था। इसके बाद अदालत ने सजा सुनाने के लिए 8 अक्टूबर की तारीख तय की थी।

फिंगरप्रिंट, खून के नमूने और DNA जांच बने अहम साक्ष्य

मामले की जांच में फिंगरप्रिंट, कपड़ों पर लगे खून के नमूने और डीएनए जांच जैसे साक्ष्यों की अहम भूमिका रही। जांच के दौरान महिला और बच्ची के साथ हुई वारदात से जुड़े साक्ष्य जुटाए गए। इसके बाद मामला अदालत में पहुंचा, जहां करीब दो साल तक सुनवाई चली।

अदालत ने 29 सितंबर को चारों आरोपियों को दोषी ठहराया था। अब 8 अक्टूबर 2026 को सजा का ऐलान करते हुए तीन दोषियों को मृत्युदंड और एक दोषी को मृत्यु तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

 

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