रीवा जिले के सिरमौर–डभौरा मार्ग पर अव्यवस्थाओं की भरमार.. बिजली खंभों की मनमानी और सड़क पैचिंग में 8 करोड़ के घोटाले के आरोप
The Sirmour-Dabhaura road in Rewa district is rife with chaos, with allegations of arbitrary installation of electricity poles and a scam worth Rs 8 crore in road patching.

रीवा मप्र रिपोर्टर सुभाष मिश्रा
सिरमौर–डभौरा सड़क मार्ग इन दिनों अव्यवस्थाओं और गंभीर आरोपों को लेकर लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। एक ओर जहां राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण से पहले बिजली विभाग द्वारा सड़क के बेहद नजदीक खंभे गाड़े जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है, वहीं दूसरी ओर इसी मार्ग पर कराए गए पैचिंग कार्य में करोड़ों रुपये के घोटाले के आरोप लग रहे हैं।

जनपद पंचायत जवा की संचार निर्माण समिति के अध्यक्ष प्रवल पाण्डेय ने सिरमौर–डभौरा मार्ग पर बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कड़ी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने बिजली विभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि सड़क पर लगाए जा रहे नए बिजली खंभे और 33 हजार केवी सहित अन्य विद्युत लाइनें सड़क से कम से कम 50 फीट की दूरी पर स्थापित की जाएं।
प्रवल पाण्डेय ने बताया कि सिरमौर–डभौरा मार्ग पर लगभग 40 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण 311 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृत है और निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ होना प्रस्तावित है। इसके बावजूद बिजली विभाग के ठेकेदारों द्वारा सड़क से मात्र 4 से 5 फीट की दूरी पर खंभे गाड़कर लाइन खींची जा रही है। जबकि सड़क के दोनों ओर पर्याप्त जगह उपलब्ध होने के बावजूद जानबूझकर खंभों को सड़क किनारे लगाया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि जैसे ही सड़क निर्माण कार्य शुरू होगा, इन खंभों को हटाना पड़ेगा, जिससे शासन को करोड़ों रुपये का अतिरिक्त और अनावश्यक खर्च उठाना पड़ेगा। यह सीधा-सीधा सरकारी धन की बर्बादी और लापरवाही का उदाहरण है। वहीं दूसरी ओर इसी सड़क पर कराए गए पैचिंग कार्य में भी बड़े घोटाले के आरोप सामने आ रहे हैं। जनचर्चा है कि करीब 8 करोड़ रुपये की लागत से कराए गए पैचिंग कार्य में भारी अनियमितताएं की गई हैं। सड़क की बदहाल स्थिति को लेकर पूर्व में सवाल उठने के बाद आनन-फानन में पैचिंग कार्य शुरू तो कराया गया, लेकिन यह केवल औपचारिकता बनकर रह गया।
स्थानीय लोगों और सूत्रों के अनुसार जर्जर सड़क की वास्तविक मरम्मत के बजाय जगह-जगह नाममात्र की पैचिंग कर दी गई। कहीं 10 मीटर, कहीं 50 मीटर तो कहीं अधिकतम 100 मीटर तक ही डामरीकरण किया गया, वह भी 20 एमएम कारपेटिंग कर अधूरा छोड़ दिया गया। आरोप है कि 8 करोड़ रुपये के टेंडर के मुकाबले धरातल पर महज 1 से 1.5 करोड़ रुपये का ही काम नजर आता है। वर्तमान में पैचिंग का कार्य पूरी तरह बंद पड़ा है और सड़क आज भी जगह-जगह से क्षतिग्रस्त है। खराब सड़क के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं, जिससे ग्रामीणों और राहगीरों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि जनता का पैसा खुलेआम बर्बाद किया जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस सड़क को लेकर पहले आवाज उठाई गई थी, अब उसी मामले पर चुप्पी क्यों साध ली गई है। जनचर्चा है कि यदि शासन-प्रशासन द्वारा निष्पक्ष और गहन जांच कराई जाए, तो न केवल बिजली खंभों की मनमानी बल्कि सड़क पैचिंग में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले की सच्चाई भी सामने आ सकती है।



