समय पर धान उठाव नहीं होने से खरीदी प्रक्रिया पर संकट में
The procurement process is in trouble due to non-lifting of paddy on time.
लोकेश्वर सिन्हा, गरियाबंद
एंकर… गरियाबंद जिले के धान खरीदी केंद्रों में इस वक्त हालात चिंताजनक बने हुए हैं। जहां एक ओर किसानों से धान की खरीदी लगातार जारी है, तो वहीं दूसरी ओर समय पर धान उठाव नहीं होने से खरीदी प्रक्रिया पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
विओ… गरियाबंद जिले के 90 धान खरीदी केंद्रों में इन दिनों धान की बंपर आवक हो रही है। लेकिन उठाव की रफ्तार बेहद धीमी है। परिणाम यह कि खरीदी केंद्र धान से पूरी तरह पट चुके हैं। पीपरछेड़ी कला, परसूली, मदनपुर, बारुला सहित सभी खरीदी केंद्रों में स्थिति इसी तरह से है, पीपरछेड़ी कला खरीदी केंद्र की बात की जाए तो यह बड़ा खरीदी केंद्र हैं, जहां 15 किलोमीटर दूर से किसान अपने धान को लाने मजबूर हैं, अब खरीदी को कुछ ही दिन शेष रह गए हैं, हालांकि किसानों के धान खरीदे तो जा रहे हैं, लेकिन उठाव एक बड़ी समस्या बनी हुई है, वहीं जगह की कमी की वजह से किसानों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। केंद्रों में चारों तरफ धान का अंबार लगा हुआ है। स्थिति यह है कि खरीदी किए गए धान को रखने तक की जगह नहीं बची है। इसके बावजूद टोकन कटे किसानों का धान केंद्र प्रभारी जैसे–तैसे जगह बनाकर खरीदी कर रहे हैं। कई केंद्रों में खुले में धान रखने की नौबत आ चुकी है। केंद्र प्रभारियों का कहना है कि उठाव में देरी से धान की सूखत और रखरखाव का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। वहीं प्रशासन की धीमी चाल पर सवाल भी उठने लगे हैं। धान उठाव की रफ्तार कछुए जैसी बताई जा रही है, जिससे खरीदी केंद्र बेहाल नजर आ रहे हैं। इस पूरे मामले पर जिला विपणन अधिकारी किशोर चंद्रा ने सफाई दी है, “जिले में अब तक 42 लाख क्विंटल धान की खरीदी हो चुकी है, जिसके विरुद्ध 15 लाख क्विंटल धान का उठाव किया जा चुका है।
मिलर्स और परिवहनकर्ताओं को लगातार निर्देश दिए जा रहे हैं, आने वाले दिनों में उठाव की गति बढ़ेगी।”
लेकिन सवाल अब भी बना हुआ है—
क्या समय रहते धान उठाव की रफ्तार बढ़ेगी ?
या फिर किसानों और खरीदी केंद्र प्रभारियों की परेशानी और बढ़ेगी ?
फिलहाल गरियाबंद में धान की आवक और उठाव की असंतुलित स्थिति प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी है।



