संयंत्र द्वारा राजहरा में छत्तीसगढ़ी लोक कला मंच ‘जंवारा’ का आयोजन
The plant organized Chhattisgarhi folk art forum 'Janwara' in Rajhara

सेल- भिलाई इस्पात संयंत्र के सामाजिक निगमित उत्तरदायित्व विभाग एवं मानव संसाधन विभाग, राजहरा खदान के संयुक्त तत्वावधान में राजहरा क्षेत्र में छत्तीसगढ़ी लोक कला मंच ‘जंवारा’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्य महाप्रबंधक (खदान) श्री आर. बी. गहरवार रहे व विशिष्ट अतिथि के तौर पर महाप्रबंधक प्रभारी (खदान) श्री जयप्रकाश, महाप्रबंधक श्री बिपिन कुमार, महाप्रबंधक श्री अरुण कुमार, महाप्रबंधक श्री एन. के. साहू तथा सीआईएसएफ के उप कमांडेंट श्री वांगखेम उपस्थित थे।

बीएसपी अपने सामाजिक निगमित उत्तरदायित्व (सीएसआर) दायित्वों के अंतर्गत आसपास के क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, खेलकूद, कला एवं लोक संस्कृति के विकास हेतु निरंतर कार्य करती है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति एवं क्षेत्रीय कलाकारों को मंच प्रदान करने की दिशा में इस लोक कला कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस सांस्कृतिक कार्यक्रम का उद्देश्य क्षेत्र की समृद्ध लोक परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के साथ-साथ स्थानीय कलाकारों को प्रोत्साहन प्रदान करना था।

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ की विविध लोक विधाओं जैसे सुआ, ददरिया, कर्मा, पंडवानी, जसगीत, पंथी, राऊतनाचा एवं गौरा-गौरी की गीत-संगीत एवं नृत्य प्रस्तुतियां दी गई।

कार्यक्रम के प्रारंभ में उप प्रबंधक (मानव संसाधन) गिरीश कुमार मढ़रिया द्वारा अतिथियों का स्वागत करते हुए आयोजन में सामाजिक निगमित उत्तरदायित्व विभाग की सहभागिता तथा खदान प्रमुख मुख्य महाप्रबंधक (खदान) श्री आर. बी. गहरवार के मार्गदर्शन एवं सहयोग की सराहना की गई।
अपने संबोधन में मुख्य महाप्रबंधक (खदान) श्री आर. बी. गहरवार ने राजहरा क्षेत्र में लंबे अंतराल के पश्चात इस प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम के पुनः आयोजन हेतु मानव संसाधन विभाग के प्रयासों की प्रशंसा की तथा भविष्य में भी ऐसे आयोजनों के निरंतर आयोजन की अपेक्षा व्यक्त की।
कार्यक्रम का संचालन मानव संसाधन विभाग के श्री रतिश मिश्रा द्वारा किया गया। आयोजन की सफलता में मानव संसाधन विभाग के श्री शैलेश पटनायक, श्री आनंद कुमार, श्री राजेश पांडे, श्री मुरलीधर चंद्राकर, श्री संतराम साहू, श्री घनश्याम पारकर, श्री हरकराम तथा सामाजिक निगमित उत्तरदायित्व विभाग के श्री कमलकांत वर्मा एवं श्री बुधेलाल का महत्वपूर्ण योगदान रहा।



