छत्तीसगढ़

स्कूल शिक्षा में गड़बड़ी का मामला हाई कोर्ट पहुंचा, बोर्ड व्यवस्था पर सवाल

The matter of irregularities in school education reached the High Court, questions were raised on the board system.

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में लंबे समय से चल रहे प्राइवेट स्कूल प्रबंधन का फर्जीवाड़ा अब सामने आ गया है। आरटीई (शिक्षा का अधिकार) में गड़बड़ी को लेकर होई कोर्ट में एक जनहित याचिका और एक हस्तक्षेप याचिका की एकसाथ सुनवाई चल रही है। छत्तीसगढ़ बोर्ड से मान्यता लेकर सीबीएसई की पढ़ाई कराने वाले स्कूल प्रबंधन के खिलाफ अभिभावकों ने एकजुट होकर कलेक्टर बंगला का घेराव भी कर दिया था।

मामले की सुनवाई के दौरान अधिवक्ताओं ने नारायणा टेक्नो व एक अन्य निजी स्कूल की मनमानी की जानकारी दी, चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने स्वत: संज्ञान लेते हुए स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को नोटिस जारी कर शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करने का निर्देश दिया है।

स्टूडेंट्स को छत्तीसगढ़ बोर्ड का एग्जाम दिलाया गया

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में स्थित संचालित नारायणा टेक्नो और एक अन्य निजी स्कूल में सीबीएसई कोर्स की पढ़ाई कराने के बाद स्टूडेंट्स को छत्तीसगढ़ बोर्ड का एग्जाम दिलाया गया। पैरेंट्स ने सीबीएसई बोर्ड की पढ़ाई कराने वाले स्कूल प्रबंधन द्वारा छत्तीसगढ़ बोर्ड से संबंधित पांचवीं व आठवीं की परीक्षा कराने को लेकर विराेध दर्ज कराते हुए जनहित याचिका दायर की है।

पैरेंट्स का कहना है कि एडमिशन के समय दोनों स्कूल प्रबंधन ने सीबीएसई मान्यता के आधार पर मोटी फीस वसूल कर एडमिशन दिया। सालभर बच्चों को निजी प्रकाशकों की महंगी किताबों से पढ़ाई कराई। बच्चों ने सीबीएसई पैटर्न से पांचवीं व आठवीं की परीक्षा भी दिलाई। इसके बाद दोनों स्कूल प्रबंधन ने छत्तीसगढ़ बोर्ड की परीक्षा भी बच्चों से दिलवा दी है।
स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव काे नोटिस जारी मांगा जवाब

याचिका के अनुसार स्कूल प्रबंधन ने बच्चों और हमारे साथ सीधे तौर पर धोखाधड़ी की है। मामले की सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव काे नोटिस जारी शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। पीआइएल की सुनवाई के लिए कोर्ट ने आठ अप्रैल की तिथि तय कर दी है।
नाराज अभिभावकों ने घेरा था कलेक्टर बंगला

प्राइवेट प्रबंधन का फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद अभिभावकों ने पहले स्कूलों में जमकर हंगामा मचाया था। इसके बाद बड़ी संख्या में पैरेंटस ने कलेक्टर बंगला का घेराव कर दिया था। इसी बीच आरटीई में सीटों को घटाने को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान अधिवक्ताओं ने कोर्ट को दो प्राइवेट स्कूलों की मनमानी और पैरेंट्स द्वारा किए जा रहे विरोध की जानकारी दी।

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने इसे स्वत: संज्ञान में लेते हुए स्कूल शिक्षा को नोटिस जारी कर शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करने का निर्देश दिया है।

परीक्षा के बाद दिलाई दोबारा परीक्षा

अधिवक्ताओं ने कोर्ट को बताया कि नारायणा टेक्नों व एक अन्य प्राइवेट स्कूल प्रबंधन की ओर से इन स्टूडेंट्स को सालभर तक सीबीएसई कोर्स की पढ़ाई कराई गई। पैरेंट्स एक साल तक उसकी तैयारी भी कराते रहे। स्कूल प्रबंधन ने फरवरी में लोकल स्तर पर एग्जाम भी ले लिया।

लेकिन बाद में स्कूल प्रबंधन को जब पता चला कि राज्य सरकार पांचवीं-आठवीं कक्षा का बोर्ड एग्जाम ले रहा है, तब स्कूल प्रबंधन ने बच्चों को सीजी बोर्ड एग्जाम दिलाने के लिए दबाव बनाया।

दरअसल प्राइवेट स्कूल प्रबंधन छत्तीसगढ़ बोर्ड की मान्यता लेकर सीबीएसई की मोटी फीस वसूल रहे हैं और फर्जी तरीके से सीबीएसई की पढ़ाई भी करा रहे हैं। राज्य सरकार द्वारा पांचवीं व आठवीं की केंद्रीयकृत परीक्षा के लिए निर्देश जारी करने के बाद यह फर्जीवाड़ा सामने आया है।

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