देश

सोने चांदी की बेतहाशा बढ़ती कीमतों का मुद्दा उठा राज्यसभा में

The issue of skyrocketing prices of gold and silver was raised in the Rajya Sabha.

नयी दिल्ली। देश में सोने और चांदी की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि का मुद्दा आज राज्यसभा में उठा और सरकार से हस्तक्षेप कर लोगों को राहत पहुंचाने की मांग की गई।

कांग्रेस के नीरज डांगी ने गुरुवार को शून्य काल के दौरान सदन में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि देश में सोने चांदी की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है और इनकी कीमतों को बेलगाम छोड़ देना सरकार की नीतिगत विफलता है। उन्होंने कहा कि सोना और चांदी के आभूषण ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार है और यह मामला बचत तथा महिलाओं की गरिमा से जुड़ा हुआ है।

उन्होंने कहा कि सरकार को लोगों को राहत पहुंचाने के लिए तत्काल हस्तक्षेप करते हुए शुल्क और जीएसटी आदि में कमी करनी चाहिए।
समाजवादी पार्टी के जावेद अली खान ने खाद्य सुरक्षा अधिनियम में लाभार्थियों की पात्रता से जुड़ी आय सीमा को बढ़ाए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि 2013 में जब यह व्यवस्था लागू हुई तो ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी पात्रता से संबंधित आय सीमा दो लाख और शहरों में तीन लाख रुपए निर्धारित की गई थी।

उन्होंने कहा कि 13 वर्ष बीत जाने के बावजूद इस सीमा में बढ़ोतरी नहीं की गई है जिससे अकेले उत्तर प्रदेश में लाखों लोगों के राशन कार्ड खत्म किए जाने की नौबत आ गई है। उन्होंने कहा कि 2013 की तुलना में अब यह आय सीमा ग्रामीण क्षेत्रों में तीन लाख 60 हजार और शहरों में पांच लाख 40 हजार रुपए की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले 13 वर्षों में महंगाई बेतहाशा बड़ी है और सातवां वेतन आयोग आने के साथ-साथ सांसदों के वेतन भी बढ़ाए गए हैं इसलिए इस क्षेत्र में भी आय सीमा बढ़ाई जानी चाहिए।

भारतीय जनता पार्टी के अमर प्रताप मौर्य ने प्रयागराज में बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए एम्स की स्थापना की मांग की।

उन्हीं की पार्टी की कल्पना सैनी ने अंगदान को राष्ट्रीय जन आंदोलन बनाने की मांग करते हुए उत्तराखंड को इसका केंद्र बनाए जाने की मांग की।
मार्क्सवादी सदस्य जॉन ब्रिटास ने हवाई किरायों में त्योहार तथा विशेष अवसरों के दौरान बेतहाशा बढ़ोतरी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि त्योहार के समय देश में हवाई किराए आसमान छूने लगते हैं और यह आम लोगों की पहुंच से बाहर हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि वह सरकार से कई बार इस व्यवस्था को बदलने तथा इसमें सुधार करने की मांग कर चुके हैं।

Related Articles

Back to top button