रायपुर। तीजा से एक दिन पहले आमतौर पर बाजार में करेले की मांग बढ़ जाती है। लेकिन रायपुर के वार्ड 34 में इस बार लोगों को करेला खरीदने बाजार जाने की जरूरत नहीं पड़ी। नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी की ओर से वार्ड की महिलाओं के घर-घर करेला पहुंचाया जा रहा।
आकाश तिवारी पिछले 7 साल से तीजा के मौके पर कड़ू भात के नेग के रूप में करेला बांट रहे हैं। इस साल भी वार्ड की करीब 800 से 1000 माताओं, बहनों, बहुओं और बेटियों तक करेला पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। इसे उन्होंने छत्तीसगढ़ की पारंपरिक तीजा संस्कृति से जुड़ी पहल बताया है।
तीजा से एक दिन पहले क्यों खाया जाता है करेला?
छत्तीसगढ़ में तीजा से एक दिन पहले कड़ू भात खाने की परंपरा है। इस दिन करेले जैसी कड़वी सब्जी खाने के पीछे धार्मिक मान्यता के साथ स्वास्थ्य से जुड़ी बातें भी बताई जाती हैं।
मान्यता है कि व्रत से एक दिन पहले शरीर को हल्का रखने और कड़वे भोजन के जरिए शुद्धि की परंपरा के रूप में कड़ू भात खाया जाता है। इसके साथ ही इसका एक सांस्कृतिक संदेश भी माना जाता है कि कड़वाहट को पीछे छोड़कर अगले दिन तीजा के व्रत और नई शुरुआत की ओर बढ़ा जाए।
तीजा के अगले दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के साथ निर्जला व्रत रखती हैं।
बाजार में 80-100 रुपए किलो तक पहुंच जाता है करेला
तीजा के समय करेले की मांग बढ़ने से कई जगह इसकी कीमत भी बढ़ जाती है। ऐसे में आकाश तिवारी की ओर से वार्ड की महिलाओं को करेला निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है।
इस पहल के जरिए कड़ू भात के लिए जरूरी करेला लोगों के घर तक पहुंचाया जा रहा है, ताकि परिवारों को इसके लिए अलग से बाजार जाने या बढ़ी कीमत पर खरीदारी करने की जरूरत न पड़े।
7 साल से निभा रहे परंपरा
आकाश तिवारी ने कहा कि तीजा छत्तीसगढ़ की संस्कृति में महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखने वाला पर्व है। उनके अनुसार वार्ड की माताओं-बहनों के साथ इस परंपरा को निभाना उनके लिए केवल आयोजन नहीं, बल्कि अपनेपन और सम्मान का विषय है।
उन्होंने कहा कि तीजा केवल व्रत का पर्व नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ी संस्कृति और पारिवारिक परंपराओं से जुड़ा त्योहार है। इसी भावना के साथ वे पिछले सात वर्षों से कड़ू भात के नेग के रूप में वार्ड की महिलाओं तक करेला पहुंचा रहे हैं।
