मध्यप्रदेश
जलता रहा खेत, सोता रहा सिस्टम, फायर ब्रिगेड की देरी से किसान की मेहनत राख, ग्रामीणों ने मांगा मुआवजा
The fields burned, the system remained asleep, the fire brigade's delay destroyed the farmer's hard work, villagers demanded compensation.

रीवा मप्र रिपोर्टर सुभाष मिश्रा

रीवा मप्र । त्यौंथर तहसील के मलपार गांव में भीषण आगजनी की घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां किसान दिलीप गौतम की खेत में खड़ी गेहूं की फसल अचानक लगी आग की चपेट में आकर पूरी तरह जलकर राख हो गई।
बताया जा रहा है कि आग इतनी तेज थी कि देखते ही देखते पूरे खेत में फैल गई। ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर आग बुझाने में जुट गए—किसी ने पानी से तो किसी ने मिट्टी डालकर आग पर काबू पाने की कोशिश की। लेकिन जिस फायर ब्रिगेड से राहत की उम्मीद थी, वह समय पर मौके पर नहीं पहुंच सकी।

ग्रामीणों का आरोप है कि सूचना देने के बावजूद दमकल वाहन काफी देर से पहुंचा। तब तक किसान की सालभर की मेहनत आग की भेंट चढ़ चुकी थी। इस लापरवाही ने एक बार फिर आपदा प्रबंधन की तैयारियों और जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना से आहत किसान दिलीप गौतम ने प्रशासन से तत्काल मुआवजे की मांग की है। उनका कहना है कि खेत में लगी आग ने उनकी आर्थिक स्थिति को पूरी तरह हिला दिया है और अब परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि अगर फायर ब्रिगेड समय पर पहुंचती तो शायद नुकसान कम हो सकता था। अब गांव के लोग प्रशासन से पीड़ित किसान को उचित मुआवजा देने और लापरवाही के लिए जिम्मेदारों पर कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में केवल जांच की औपचारिकता निभाता है या फिर पीड़ित किसान को वास्तविक राहत दिलाने के लिए ठोस कदम उठाता है।



