छत्तीसगढ़
मड़वा पॉवर प्लांट क्षेत्र में तेंदुए की आशंका समाप्त, वन विभाग ने नागरिकों से मांगी सहयोग की अपील
The fear of leopard in the Madwa Power Plant area has ended, the Forest Department has appealed to the citizens for cooperation.

तेन्दुआ अपने प्राकृतिक आवास की ओर लौटा, क्षेत्र में निगरानी और गश्त जारी रहेगी

जांजगीर-चांपा। मड़वा पॉवर प्लांट क्षेत्र में बीते दिनों तेंदुए की उपस्थिति को लेकर बनी आशंका अब समाप्त हो गई है। वन विभाग ने आज जानकारी दी है कि क्षेत्र में की जा रही सघन निगरानी और लगातार निरीक्षण के दौरान पिछले चार दिनों से प्लांट परिसर या आस-पास के किसी भी हिस्से में उक्त वन्यप्राणी की उपस्थिति दर्ज नहीं की गई है। वन विभाग का अनुमान है कि तेन्दुआ अब सुरक्षित रूप से अपने प्राकृतिक वन क्षेत्र की ओर वापस लौट गया है। विभाग क्षेत्र में निरंतर गश्त और निगरानी जारी रखेगा। नागरिकों से अपेक्षा है कि वे शांत रहें, अफवाहों पर ध्यान न दें और विभाग द्वारा जारी निर्देशों का पालन कर वन्यजीव संरक्षण में अपना सामूहिक योगदान दें। वन विभाग ने क्षेत्र के नागरिकों से भयभीत न होने और अनावश्यक अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है, लेकिन साथ ही सतर्कता बनाए रखने का आग्रह किया है। विभाग की उड़नदस्ता टीम आस-पास के गाँवों में मुनादी और जन-जागरूकता अभियान चला रही है, जिसके माध्यम से ग्रामीणों को सुरक्षित रहने के उपायों की जानकारी दी जा रही है। बच्चों एवं वृध्द्धजनों को सुबह (प्रातः) एवं शाम (सायंकाल) के समय अकेले बाहर न जाने दें। खेतों या खुले स्थानों पर रात में अकेले न ठहरें। पशुपालक अपने पशुधन को रात्रि के समय सुरक्षित बाड़ों (एनक्लोजर) में ही रखें।
वन्यजीवों को हानि पहुँचाना है गंभीर अपराध
वन विभाग यह स्पष्ट करना चाहता है कि तेन्दुआ अनुसूची-1 के अंतर्गत एक संरक्षित वन्यप्राणी है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत, किसी भी व्यक्ति द्वारा वन्यजीव को हानि पहुँचाने, चिढ़ाने, डराने, अवैध रूप से जाल बिछाने, करंट प्रवाहित करने, या किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि करने पर कठोर दण्डात्मक कार्यवाही की जाएगी। वन्यजीव हमारे पर्यावरण की अमूल्य धरोहर हैं। इनके साथ सह-अस्तित्व का भाव बनाए रखना ही वास्तविक संरक्षण है।



