सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र द्वारा विभिन्न संयंत्रों के बीच अनुभवों एवं श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान के उद्देश्य से 3 एवं 4 नवंबर 2026 को भिलाई निवास के बहुउद्देशीय सभागार में दो दिवसीय कार्यशाला ‘लर्निंग फ्रॉम इच अदर’ (एलईओ) का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यशाला का उद्घाटन 03 नवंबर 2026 को भिलाई इस्पात संयंत्र के निदेशक प्रभारी श्री चित्त रंजन महापात्र द्वारा कार्यपालक निदेशक (मानव संसाधन) श्री पवन कुमार, कार्यपालक निदेशक (वर्क्स) श्री राकेश कुमार की उपस्थिति में किया गया।
इस अवसर पर मुख्य महाप्रबंधक (आयरन) श्री मनोज कुमार, मुख्य महाप्रबंधक (ब्लास्ट फर्नेस) श्री विवेक वर्मा, मुख्य महाप्रबंधक (ओएचपी) श्री आर बी गहरवार तथा मुख्य महाप्रबंधक (कोक ओवन) श्री तुलाराम बेहेरा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारीगण उपस्थित थे। कार्यशाला में राउरकेला स्टील प्लांट, दुर्गापुर स्टील प्लांट, बोकारो स्टील प्लांट, आरडीसीआईएस, आईएसपी बर्नपुर और सेल-भिलाई स्टील प्लांट के प्रतिभागियों ने भाग लिया और सभी भाग लेने वाली इकाइयों व संयंत्रों द्वारा प्रस्तुतियां दी गईं।
कार्यशाला में प्रतिभागी संस्थानों के प्रतिनिधियों ने ‘लार्ज एंड मिड वॉल्यूम ब्लास्ट फर्नेस में ऑपरेशनल चैलेंजेस एंड बेस्ट प्रैक्टिसेज’ विषय पर अपने अनुभव एवं तकनीकी जानकारियाँ साझा कीं। इस दौरान ब्लास्ट फर्नेस के संचालन एवं रखरखाव में अपनाई जा रही प्रभावी कार्यप्रणालियों पर चर्चा की गई, ताकि विभिन्न संयंत्र इनसे लाभान्वित होकर अपने यहाँ भी इनका उपयोग कर सकें। आपसी विचार-विमर्श एवं अनुभवों के आदान-प्रदान के माध्यम से परिचालन संबंधी चुनौतियों के बेहतर एवं व्यावहारिक समाधान विकसित करने की दिशा में चर्चा की जा रही है।
निदेशक प्रभारी श्री चित्त रंजन महापात्र ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए में कहा कि इस कार्यशाला का उद्देश्य विभिन्न इस्पात संयंत्रों में सामने आने वाली परिचालन संबंधी समस्याओं पर सामूहिक रूप से चर्चा करना तथा एक-दूसरे के अनुभवों से सीखना है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक संयंत्र में कार्य करने की अपनी विशिष्ट पद्धतियाँ एवं चुनौतियाँ होती हैं। ऐसे में विभिन्न संयंत्रों द्वारा अपनाई जा रही कार्यप्रणालियों, विशेषकर ब्लास्ट फर्नेस के संचालन के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों और प्रक्रियाओं को साझा करना उपयोगी होगा। उन्होंने प्रतिभागियों से अपने संयंत्रों की समस्याओं एवं अनुभवों को खुलकर साझा करने का आग्रह किया, ताकि अन्य संयंत्रों की बेहतर कार्यप्रणालियों से सीख लेकर परिचालन संबंधी कमियों को दूर करने और कार्यक्षमता में सुधार लाने की दिशा में प्रयास किए जा सकें।
कार्यपालक निदेशक (मानव संसाधन) श्री पवन कुमार ने इस प्रकार की तकनीकी कार्यशालाओं के नियमित आयोजन की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि ऐसी कार्यशालाओं के माध्यम से विभिन्न इस्पात संयंत्रों को अपने अनुभवों, तकनीकी जानकारियों एवं बेहतर कार्यप्रणालियों को साझा करने का अवसर मिलता है, जिससे ब्लास्ट फर्नेस की उत्पादकता एवं परिचालन दक्षता में सुधार के नए अवसर तलाशे जा सकते हैं। उन्होंने बड़ी, मध्यम एवं छोटी क्षमता वाली ब्लास्ट फर्नेस की विशिष्टताओं का उल्लेख करते हुए उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने तथा उत्पादन क्षमता को बेहतर बनाने के लिए आपसी विचार-विमर्श को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने प्रतिभागी संस्थानों के बीच निरंतर संवाद एवं तकनीकी सहयोग बनाए रखने की आवश्यकता पर भी बल दिया, ताकि परिचालन संबंधी चुनौतियों का सामूहिक रूप से समाधान किया जा सके। अंत में उन्होंने कार्यशाला की सफलता की कामना करते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों को नियमित रूप से जारी रखने की अपेक्षा व्यक्त की।
कार्यपालक निदेशक (वर्क्स) श्री राकेश कुमार ने अपने संबोधन में उत्पादन लागत में कमी को संयंत्र की लाभप्रदता बढ़ाने का प्रमुख आधार बताते हुए ब्लास्ट फर्नेस की उत्पादकता एवं परिचालन दक्षता में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विभिन्न संयंत्रों में अपनाई जा रही बेहतर कार्यप्रणालियों एवं तकनीकी उपायों को साझा करने से उत्पादन संबंधी चुनौतियों के समाधान और बेहतर परिणाम प्राप्त करने में सहायता मिलेगी। उन्होंने भिलाई इस्पात संयंत्र की उत्पादन एवं लाभप्रदता संबंधी क्षमताओं का उल्लेख करते हुए कार्यस्थल सुरक्षा, एआई आधारित सुरक्षा निगरानी तथा ब्लास्ट फर्नेस की तकनीकी स्थिति की मॉनिटरिंग जैसे क्षेत्रों में भी श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने प्रतिभागी संयंत्रों के प्रतिनिधियों से कार्यशाला के बाद भी नियमित संपर्क एवं आपसी संवाद बनाए रखने का आग्रह किया, ताकि तकनीकी अनुभवों और नए विचारों का लाभ पूरे सेल के संयंत्रों को मिल सके।
मुख्य महाप्रबंधक (आयरन) श्री मनोज कुमार ने आभार प्रदर्शन करते हुए कहा कि इस कार्यशाला से अन्य संयंत्रों द्वारा अपनाई जा रही बेस्ट प्रैक्टिसेज से सीख लेकर अपने-अपने संयंत्रों में कार्यप्रणालियों को और बेहतर बनाने के अवसर प्राप्त होंगे। कार्यशाला का संचालन उप प्रबंधक (एचआर-एल एंड डी) सुश्री सुष्मिता पाटला ने किया।
इस कार्यशाला ने विभिन्न इस्पात संयंत्रों के विशेषज्ञों एवं प्रतिनिधियों को ब्लास्ट फर्नेस संचालन से जुड़े अपने अनुभवों और तकनीकी जानकारियों को साझा करने का अवसर प्रदान किया। चर्चा के दौरान विभिन्न संयंत्रों में अपनाए जा रहे तरीकों, सामने आने वाली परिचालन संबंधी कठिनाइयों तथा उनके समाधान के लिए किए गए प्रयासों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है। इसका उद्देश्य सफल कार्यप्रणालियों को व्यापक स्तर पर अपनाने की संभावनाओं को प्रोत्साहित करना है।
