रिपोर्टर – सुभाष मिश्रा, रीवा (म.प्र.)
रीवा। जवा जनपद के जन शिक्षा केन्द्र बरहुला अंतर्गत स्थित शासकीय प्राथमिक शाला टिकैतनपुरवा की हालत इतनी जर्जर हो चुकी है कि बच्चों और शिक्षकों की जान पर बन आई है। स्कूल की छत से लोहे की छड़ें झूल रही हैं, दीवारों में दरारें हैं, और हर वक्त यह भय बना रहता है कि कहीं छत का हिस्सा गिर न जाए।
कक्षा एक से पांच तक संचालित इस विद्यालय में 28 विद्यार्थी और 2 शिक्षक हैं। पढ़ाई के दौरान कई बार छत का प्लास्टर गिर चुका है — एक बार तो गिरा हुआ प्लास्टर टेबल पर गिरा जिससे टेबल टूट गई।
बरसात में स्कूल बन जाता है जानलेवा!
बरसात के मौसम में हालात इतने खतरनाक हो जाते हैं कि स्कूल को 3–4 महीने तक बंद रखना पड़ता है। इस दौरान बच्चे शिक्षा से पूरी तरह वंचित रह जाते हैं।
शिकायतें पहुंचीं, कार्रवाई नहीं
शिक्षकों का करिपोर्टर – सुभाष मिश्रा, रीवा (म.प्र.)
टिकैतनपुरवा स्कूल की हालत खतरनाक — छत से झूल रही छड़ें, बच्चों की जान पर बन आई पढ़ाई!
रीवा।
जवा जनपद के जन शिक्षा केन्द्र बरहुला अंतर्गत स्थित शासकीय प्राथमिक शाला टिकैतनपुरवा की हालत इतनी जर्जर हो चुकी है कि बच्चों और शिक्षकों की जान पर बन आई है। स्कूल की छत से लोहे की छड़ें झूल रही हैं, दीवारों में दरारें हैं, और हर वक्त यह भय बना रहता है कि कहीं छत का हिस्सा गिर न जाए।
कक्षा एक से पांच तक संचालित इस विद्यालय में 28 विद्यार्थी और 2 शिक्षक हैं। पढ़ाई के दौरान कई बार छत का प्लास्टर गिर चुका है — एक बार तो गिरा हुआ प्लास्टर टेबल पर गिरा जिससे टेबल टूट गई।
बरसात में स्कूल बन जाता है जानलेवा!
बरसात के मौसम में हालात इतने खतरनाक हो जाते हैं कि स्कूल को 3–4 महीने तक बंद रखना पड़ता है। इस दौरान बच्चे शिक्षा से पूरी तरह वंचित रह जाते हैं।
शिकायतें पहुंचीं, कार्रवाई नहीं
शिक्षकों का कहना है कि विभागीय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को कई बार लिखित शिकायतें दी गईं, लेकिन दो वर्षों से कोई सुनवाई नहीं हुई। ग्रामीण अब अपने बच्चों को स्कूल भेजने से कतराने लगे हैं।
मिड-डे मील पर भी सवाल
विद्यालय में मेनू के अनुसार भोजन नहीं दिया जा रहा है। बच्चों ने बताया कि रोज केवल चावल और दाल ही बनता है। बताया जा रहा है कि दुर्गा स्व-सहायता समूह टिकैतनपुरवा बच्चों के भोजन में खुलेआम डाका डाल रहा है, और प्रशासन मौन है।
अब सवाल उठता है —
«क्या सरकार किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रही है?
कब सुधरेंगे टिकैतनपुरवा स्कूल के हालात, और कब सुरक्षित माहौल में पढ़ सकेंगे बच्चे?»हना है कि विभागीय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को कई बार लिखित शिकायतें दी गईं, लेकिन दो वर्षों से कोई सुनवाई नहीं हुई। ग्रामीण अब अपने बच्चों को स्कूल भेजने से कतराने लगे हैं।
मिड-डे मील पर भी सवाल
विद्यालय में मेनू के अनुसार भोजन नहीं दिया जा रहा है। बच्चों ने बताया कि रोज केवल चावल और दाल ही बनता है। बताया जा रहा है कि दुर्गा स्व-सहायता समूह टिकैतनपुरवा बच्चों के भोजन में खुलेआम डाका डाल रहा है, और प्रशासन मौन है।
अब सवाल उठता है —
«क्या सरकार किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रही है?
कब सुधरेंगे टिकैतनपुरवा स्कूल के हालात, और कब सुरक्षित माहौल में पढ़ सकेंगे बच्चे?»
