छत्तीसगढ़

ब्राह्मण समाज द्वारा आयोजित सामूहिक व्रत उपनयन संस्कार में 6 बटुकों का सामूहिक जनेऊ संस्कार सम्पन्न

The collective sacred thread ceremony of 6 boys was completed in the collective fast Upanayana ceremony organized by the Brahmin community.

देवीचरण ठाकुर

देवभोग_ देवभोग धर्मगढ़ ब्राह्मण समाज द्वारा आयोजित सामूहिक व्रत उपनयन संस्कार में 6 बटुकों का सामूहिक जनेऊ संस्कार सम्पन्न कराया गया।उपदेश देने पहुंचे प्रसिद्ध कथा वाचक ने कहा यज्ञोपवीत के बाद ब्राह्मण का दूसरा जन्म होता है,जहां धर्म समाज और राष्ट्र हित में कई अहम जिम्मेदारियों का बोझ उठाना पड़ता है।
       स्थानीय प्राचीन जगन्नाथ मंदिर में आज पहली बार देवभोग ब्राह्मण समाज ने सामूहिक जनेऊ संस्कार सम्पन्न किया गया।ओडिसा धर्मगढ़ ब्राह्मण समाज के साथ मिल संयुक्त तत्वाधान में आयोजित इस संस्कार आयोजन में 6 बटुकों का संस्कार धूमधाम से सम्पन्न कराया गया।वैदिक मंत्रोचार,यज्ञ हवन के साथ ही यज्ञोपवित के समस्त विधि के साथ जनेउ संस्कार हुआ।आयोजन में बटुकों के समस्त परिजन,रिश्ते नाते दार आयोजन में बड़ी संख्या में भाग लिए।गायत्री महामंत्र के साथ ही बटुक तापस कुमार मुंड,स्वागत अवस्थी, मानस रंजन ठाकुर , दूतिकृष्ण तिवारी चंदन शर्मा एवं
देव शर्मा का जनेऊ धारण कराया गया।बटुकों को उपदेश और आशीर्वचन देने प्रसिद्ध कथा वाचक पंडित युवराज पांडेय पहुंचे थे।जिन्होंने ब्रह्म उवाच करते हुए बटुकों को कहा कि यह अब आप सभी का दूसरा जन्म है,जहा धर्म,समाज राष्ट्र और माता पिता के हितचिंता करने की जवाबदारी शुरू हो जाती है।पाण्डेय ने कहा कि प्रत्येक ब्राम्हण को तीन महान कार्य शिक्षा,दीक्षा और भिक्षा करना होता है,जो यज्ञोपवीत संस्कार के साथ साथ शुरू हो जाता है। ब्राह्मत्व केवल एक जाति नहीं बल्कि ऐसी जिम्मेदारी का नाम है जिसे संस्कार और आचरण से जाना जाता है।
  युवराज पाण्डेय समेत पधारे समाज प्रमुख जोगेंद्र बेहेरा,देवेद्र बेहरा, राजेश तिवारी ,रौशन अवस्थी,सुशील अवस्थी,तुषार पटजोशी ,सुरेश मुंड,हेमंत पंडा ,जयंत मुंड ,अजित पंडा,शांतनु मुंड समेत समस्त वरिष्ठ सामाजिक प्रतिनिधियों ने वैदिक मंत्रोचार के साथ बटुकों को आशीर्वाद देकर उनके ब्राह्मणत्व जीवन के शुरुवात के लिए शुभकामनाएं दिया।
मितव्ययता को रोकना उद्देश्य_ आयोजन के उद्देश्य को लेकर पंडित जोगेंद्र बेहेरा ने कहा कि ऐसे सामूहिक आयोजनों से मितव्ययता पर रोक लगती है।आर्थिक रूप से कमजोर समाज के लोगों को अनिवार्य संस्कार सम्पन्न करने में सहयोग करना आयोजन का उद्देश्य है।जनेऊ संस्कार में मामा की मौजूदगी अनिवार्य माना जाता है,ऐसे एक बटुक के लिए आवश्यकता हुई तो आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले जय विलास शर्मा उनकी धर्म पत्नी के साथ मामा मामी बन कर इस रस्म को विधि विधान से पूर्ण किया।सामाजिक सरोकार के लिए ऐसे आयोजनो को प्रेरणादायक पहल माना जा रहा है।प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष सहयोग करने वाले सामाजिक व समस्त शुभचिंतकों को आयोजकों ने आभार व्यक्त कर आयोजन को संपन्न किया

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