रीवा मप्र रिपोर्टर सुभाष मिश्रा
रीवा। सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों का मुख्य उद्देश्य किसी भी विभाग के ऐसे मामलों में जनसामान्य का पक्ष रखना था जिनमें वे शोषित थे,परंतु आज वर्तमान परिवेश में यह महत्वपूर्ण योजना अपनी महत्वता को पीछे छोड़ अन्य विभागों के लिए अनावश्यक दवाब का जरिया बनती जा रही है,आज इसके कुछ ऐसे पक्ष है जिनमें सुधार किया जाना न केवल आवश्यक प्रतीत हो रहा है बल्कि उनकी अनिवार्यता को नज़रंदाज़ नहीं किया जा सकता।
CM हेल्पलाइन में एक ही समस्या को लेकर शिकायतकर्ता कई नाम और नम्बर से शिकायत करते है जिनमें से कई शिकायत शिकायती पक्ष द्वारा अनावश्यक दवाब बना कर ख़ुद को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से की जाती है।
शिकायतकर्ता द्वारा अपूर्ण शिकायत की जाती एवं कई बार नंबर से संपर्क नहीं हो पाता या शिकायतकर्ता बाहर होता है प्रत्यक्ष सुनवाई संभव न हो पाने से शिकायत का समाधान नहीं हो पाता ।
बल की कमी और कार्य की अधिकता से अनावश्यक शिकायत कही न कही सरदर्द बन गई है।
रैंकिंग लाने का दवाब कई बार गलतियों का कारण बनता है जैसे मऊगंज में कुछ कर्मचारियों को शिकायत पर हटाया गया।
जमीनी विवाद की शिकायत पुलिस के पास आती है जिनमें फरियादी झूठी मारपीट की शिकायत कई बार लिखवाते है।
