रिपोर्ट:- मीनू साहू
बालोद:- ग्राम अरमुरकसा जिला बालोद छत्तीसगढ़ की जय मां लक्ष्मी स्व-सहायता समूह की महिलाएं आज गंभीर संकट में हैं। ग्रामीण औद्योगिक पार्क (रीपा) में लगी मिलेट्स चिक्की निर्माण इकाई ने उन्हें आत्मनिर्भरता की राह पर ला खड़ा किया था, लेकिन कलेक्टर बालोद के उदासीन रवैये ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया है।
रोज़गार बंद, 40 महिलाओं की रोज़ी-रोटी संकट में
इस इकाई से 40 गरीब परिवारों की महिलाएं आजीविका पा रही थीं। यहां से अब तक 23.89 टन उत्पादन कर लगभग 24 लाख रुपये की बिक्री हुई। हर महीने 53 हजार रुपये का लाभ समूह को मिलता था। यही रकम उनके परिवार की जरूरतें पूरी करती थी। लेकिन आदेश न मिलने से महीनों से चूल्हे तक ठंडे पड़ गए हैं।
प्रशासन की नाकामी – गरीब परिवारों की रोटी पर प्रहार
यह उत्पादन केंद्र सिर्फ रोजगार नहीं बल्कि महिलाओं की मेहनत और आत्मसम्मान का प्रतीक था। अब इसके बंद होने से महिलाएं दो वक्त के भोजन और बच्चों की पढ़ाई तक के लिए संघर्ष कर रही हैं। सवाल यह है कि जिला प्रशासन योजनाओं को चलाने आया है या उन्हें मारने?
कलेक्टर की उदासीनता पर जनता का गुस्सा
जब इकाई से इतना उत्पादन और लाभ मिल रहा था तो फिर इसे बंद क्यों किया गया? कार्यादेश क्यों रोक दिए गए? क्या कलेक्टर बालोद गरीब महिलाओं की मेहनत को मजाक समझते हैं? प्रशासन की यह लापरवाही सीधे-सीधे गरीब परिवारों का गला घोंटने जैसा अपराध है।
मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग
महिलाओं ने मुख्यमंत्री से अपील की है कि मिलेट्स चिक्की इकाई को फिर से चालू कराया जाए। उनका कहना है कि यह मुद्दा सिर्फ कामकाज का नहीं बल्कि 40 परिवारों के अस्तित्व से जुड़ा है। अगर शासन ने तत्काल हस्तक्षेप नहीं किया तो कई परिवार भूख और कर्ज की खाई में धकेल दिए जाएंगे।
