रीवा मप्र रिपोर्टर सुभाष मिश्रा
सेवानिवृत्त, सेवारत और दिवंगत शिक्षकों को किया याद; गोकुल प्रसाद त्रिपाठी बोले- शिक्षक ही राष्ट्र के नव-निर्माता
जवा। शिक्षक केवल बच्चों को किताबों का ज्ञान नहीं देते, बल्कि संस्कार, अनुशासन और जीवन की दिशा देकर समाज और राष्ट्र का भविष्य गढ़ते हैं। शिक्षक दिवस के अवसर पर रीवा जिले के जवा जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत बड़ाछ में शिक्षकों के सम्मान का विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।
ग्राम पंचायत के सरपंच प्रदीप कुमार सिंह ‘दीपू’ ने सेवानिवृत्त, सेवारत और दिवंगत शिक्षकों की स्मृति में सम्मान समारोह आयोजित कर शिक्षकों एवं क्षेत्र के गणमान्य लोगों को शॉल, श्रीफल और प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मानित किया।
कई वर्षों से निभा रहे शिक्षकों के सम्मान की परंपरा
सरपंच प्रदीप कुमार सिंह ‘दीपू’ पिछले कई वर्षों से शिक्षक दिवस के अवसर पर क्षेत्र के शिक्षकों और शिक्षा से जुड़े लोगों को सम्मानित करते आ रहे हैं। इस बार भी उन्होंने शिक्षक दिवस को केवल औपचारिक आयोजन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि शिक्षकों के योगदान को याद करते हुए सम्मान समारोह आयोजित किया।
इस पहल का उद्देश्य समाज में शिक्षकों के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत करना और नई पीढ़ी को उनके योगदान से परिचित कराना बताया गया।
इन शिक्षकों और समाजसेवियों का हुआ सम्मान
सम्मान समारोह में सेवानिवृत्त शिक्षक राधाकांत त्रिपाठी, वीरेंद्र बहादुर सिंह, गोकुल प्रसाद त्रिपाठी और बद्रीप्रसन्न पाण्डेय को सम्मानित किया गया।
इसके अलावा समाजसेवी हरिमोहन द्विवेदी, महाविद्यालय प्राचार्य रावेंद्र बहादुर सिंह, शिवसेवक पाठक एवं पटवारी राहुल सिंह को भी शॉल, श्रीफल और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
गोकुल प्रसाद त्रिपाठी बोले- शिक्षक राष्ट्र के नव-निर्माता
कार्यक्रम में सेवानिवृत्त शिक्षक गोकुल प्रसाद त्रिपाठी ने कहा कि शिक्षक राष्ट्र के नव-निर्माता हैं। किसी भी देश की मजबूत नींव शिक्षित और संस्कारित नागरिकों से तैयार होती है और ऐसे नागरिकों के निर्माण में शिक्षक की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
उन्होंने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान नहीं देते, बल्कि उन्हें संस्कार, अनुशासन, जिम्मेदारी और जीवन जीने की कला भी सिखाते हैं।
दिवंगत शिक्षकों को भी किया याद
कार्यक्रम के दौरान उन शिक्षकों को भी याद किया गया, जिन्होंने अपने जीवनकाल में शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया और अब इस दुनिया में नहीं हैं। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षक भले ही सेवानिवृत्त हो जाएं, लेकिन उनके द्वारा पढ़ाए गए विद्यार्थी और समाज में उनके योगदान की छाप हमेशा बनी रहती है।
शिक्षकों का सम्मान बढ़ाता है मनोबल
समाजसेवी धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि शिक्षक का सम्मान केवल शिक्षक दिवस तक सीमित नहीं रहना चाहिए। समाज में हर समय शिक्षकों के योगदान को सम्मान मिलना चाहिए।
उन्होंने सरपंच प्रदीप कुमार सिंह ‘दीपू’ की पहल की सराहना करते हुए कहा कि लगातार कई वर्षों से शिक्षक दिवस पर शिक्षकों को सम्मानित करना ग्रामीण क्षेत्र में एक सकारात्मक संदेश देता है और नई पीढ़ी को भी शिक्षा तथा गुरुजनों के प्रति सम्मान की प्रेरणा देता है।
राधाकृष्णन की जयंती पर मनाया जाता है शिक्षक दिवस
भारत के पूर्व राष्ट्रपति और महान शिक्षाविद डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के अवसर पर देशभर में शिक्षक दिवस मनाया जाता है। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को याद करते हुए इस दिन को शिक्षकों के सम्मान के लिए समर्पित किया गया है।
ग्राम पंचायत बड़ाछ में आयोजित यह कार्यक्रम भी इसी भावना का उदाहरण बना, जहां शिक्षकों के योगदान को याद करते हुए उन्हें सम्मानित किया गया और समाज को शिक्षा तथा गुरुजनों के सम्मान का संदेश दिया गया।
