बलरामपुर /(शोएब सिद्दिकी) बलरामपुर जिले की शासकीय उचित मूल्य दुकानों में शासन द्वारा तय दरों की खुलेआम अनदेखी किए जाने का मामला सामने आया है।
शक्कर का शासकीय मूल्य 17 रुपये प्रति किलो निर्धारित है, लेकिन संबंधित उचित मूल्य दुकान में हितग्राहियों से 20 रुपये प्रति किलो वसूले जाने का आरोप है।
यह वसूली केवल नकद ही नहीं, बल्कि ऑनलाइन भुगतान (UPI/डिजिटल माध्यम) से भी धड़ल्ले से की जा रही है।
छोटी वसूली, बड़ी अवैध कमाई
हितग्राहियों का कहना है कि प्रति किलो 2–3 रुपये की छोटी राशि होने के कारण अधिकतर लोग विरोध नहीं करते। लेकिन जब यही छोटी वसूली लगभग 1500 हितग्राहियों से हर माह की जाती है, तो दुकान संचालक द्वारा करीब 4500 रुपये प्रति माह और सालाना लगभग 54 हजार रुपये की अवैध कमाई किए जाने का आरोप सामने आता है।
रसीद 17 की, भुगतान 20 का
जनवरी 2026 माह की शासकीय राशन रसीद में शक्कर का मूल्य ₹17 दर्ज है, लेकिन हितग्राहियों का आरोप है कि हर महीने हितग्रहियों से पूरे ₹20 लिए जाते हैं। हितग्राहियों से सीधे ₹20 ऑनलाइन ट्रांसफर भी कराए जाते हैं, जिससे अतिरिक्त वसूली को सामान्य प्रक्रिया बना दिया गया है।
कभी शक्कर, कभी चना — वितरण भी अनियमित
मामला केवल अवैध वसूली तक सीमित नहीं है। हितग्राहियों का कहना है कि राशन वितरण भी नियमित नहीं है।
किसी महीने शक्कर मिलती है, तो किसी महीने नहीं
कभी चना दिया जाता है, तो कई बार उसका वितरण भी नहीं होता, इस अनिश्चितता के कारण गरीब और जरूरतमंद परिवार लगातार परेशानी में रहते हैं।
नियमों का उल्लंघन, कार्रवाई की मांग
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के नियमों के अनुसार शासकीय दर से अधिक वसूली और राशन सामग्री का अनियमित वितरण दंडनीय अपराध है। ऐसे मामलों में दुकान संचालक का लाइसेंस निलंबन, जुर्माना और FIR तक का प्रावधान है।
प्रशासन से सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि—
क्या खाद्य विभाग को इस अवैध वसूली और अनियमित वितरण की जानकारी नहीं है?
यदि जानकारी है, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
