बालोद में रिसॉर्ट से लकड़ी का जखीरा जब्त

Stockpile of wood seized from a resort in Balod

बालोद। डौंडीलोहारा वन परिक्षेत्र के खरखरा जलाशय किनारे ग्राम घोरदा स्थित बैना रिसॉर्ट में लकड़ी के अवैध कारोबार और वर्कशॉप संचालन की सूचना पर बुधवार को वन विभाग ने दबिश दी। जांच के दौरान रिसॉर्ट परिसर में बड़ी मात्रा में बीजा सहित मिश्रित प्रजाति का चिरान, दरवाजे, चौखट, बेड, पल्ले और अन्य फर्नीचर मिला।

वन विभाग के अनुसार परिसर में लकड़ी से फर्नीचर तैयार करने का काम भी चल रहा था। कार्रवाई के दौरान लकड़ी से संबंधित वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए।

टीम ने अचानक पहुंचकर परिसर की जांच की

वन विभाग को रिसॉर्ट में लंबे समय से लकड़ी के उपयोग और गतिविधियों की सूचना मिल रही थी। बुधवार को टीम ने अचानक पहुंचकर परिसर की जांच की। अधिकारियों के अनुसार संचालक द्वारा बाहर से लकड़ी लाकर परिसर में ही वर्कशॉप तैयार की गई थी। यहां दरवाजे, बेड, पल्ले, चौखट और अन्य फर्नीचर तैयार किए जा रहे थे।

सूर्यास्त के कारण नहीं हो सकी पूरी गणना

डीएफओ अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि कार्रवाई के दौरान भारी मात्रा में बीजा और चिरान मिला है। सूर्यास्त होने के कारण बुधवार को मौके पर मौजूद लकड़ी और तैयार सामग्री की पूरी गणना नहीं हो सकी। इसके चलते वन विभाग के एक कर्मचारी को रात में मौके पर तैनात किया गया है।

गुरुवार को वनमंडल स्तरीय उड़नदस्ता टीम की मौजूदगी में रिसोर्ट परिसर में रखे संपूर्ण काष्ठ, चिरान, निर्मित व निर्माणाधीन चौखट, दरवाजे और अन्य लकड़ी की सामग्री की विस्तृत गणना की जाएगी।

लकड़ी के स्रोत की भी होगी जांच

वन विभाग अब रिसोर्ट में मिली लकड़ी की मात्रा के साथ उसके स्रोत की भी पड़ताल करेगा। लकड़ी कहां से लाई गई, किससे खरीदी गई और परिवहन से संबंधित वैध दस्तावेज हैं या नहीं, इसकी जांच होगी। यदि जांच में लकड़ी अवैध तरीके से लाए जाने की पुष्टि होती है तो उससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जाएगी।

पुलिस-राजस्व के साथ होगी संयुक्त कार्रवाई

डीएफओ ने बताया कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए गुरुवार को पुलिस और राजस्व विभाग के सहयोग से संयुक्त कार्रवाई की जाएगी। मौके पर मिली लकड़ी और उससे तैयार फर्नीचर का मिलान व मूल्यांकन करने के बाद नियमानुसार कार्रवाई होगी।

बुधवार की कार्रवाई में वन परिक्षेत्र अधिकारी, सहायक वन परिक्षेत्र अधिकारी सहित वन अमला मौजूद रहा। विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि परिसर में कितनी लकड़ी थी और उसमें कितनी के वैध दस्तावेज उपलब्ध हैं।

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