“साहब, मैं जिंदा हूं… मेरी जमीन दिला दीजिए”

“Sir, I am alive… please give me my land.”

रीवा (म.प्र.) | रिपोर्टर: सुभाष मिश्रा

रीवा (म.प्र.) : दो मामा को कागजों में मृत घोषित कर भांजे ने सरपंच से सांठगांठ कर बड़ा फर्जीवाड़ा किया। फर्जी खानदानी सांचरा बनवाकर जीवित व्यक्तियों को मृत दिखाया गया और उनकी जमीन अपने नाम करा ली गई। अब पीड़ित मामा हाथ में आवेदन लेकर तहसील, थाना और एसडीएम कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। पीड़ित की गुहार है— “मैं जिंदा हूं साहब, मेरी जमीन दिला दो।” मामला सोहागी थाना क्षेत्र के मझिगवां गांव का है।
रीवा जिले की त्योंथर तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत मझिगवां में सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां ग्राम पंचायत सरपंच पर फर्जी खानदानी सांचरा बनाकर दो जीवित व्यक्तियों को मृत घोषित करने का गंभीर आरोप लगा है।
जानकारी के अनुसार मझिगवां गांव निवासी महेंद्र पाल और अमरनाथ पाल, पिता की मृत्यु के बाद करीब 14 वर्ष पूर्व मजदूरी के लिए राजस्थान चले गए थे। लंबे समय तक गांव न लौटने का फायदा उठाकर उनके भांजे अर्जुन प्रसाद ने गांव में दोनों मामा की मृत्यु की झूठी खबर फैला दी। इतना ही नहीं, बाकायदा तेरहवीं संस्कार कर हजारों लोगों को भोज भी कराया गया।
आरोप है कि इसके बाद भांजे अर्जुन प्रसाद ने ग्राम पंचायत मझिगवां की सरपंच कलावती से मिलीभगत कर फर्जी खानदानी सांचरा तैयार कराया और तहसील कार्यालय से दोनों मामा की जमीन अपने नाम दर्ज करा ली। बाद में जमीन का एक हिस्सा अन्य लोगों को बेच भी दिया गया।
जब दोनों मामा गांव लौटे तो उन्हें यह जानकर गहरा सदमा लगा कि कागजों में वे मृत घोषित किए जा चुके हैं और उनकी जमीन भी उनके नाम से गायब है। अब “कागजों के मृत” बने दोनों मामा एक आवेदन पर लिखकर— “साहब, मैं जिंदा हूं, मेरी जमीन दिला दी जाए”— एसडीएम, तहसीलदार और थाना प्रभारी के कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं।
पीड़ित मामा का कहना है कि तहसील और थाने के लगातार चक्कर लगाते-लगाते वे थक चुके हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि 7 दिनों के भीतर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो वे तहसील कार्यालय के सामने आत्मदाह करने को मजबूर होंगे।
इस संबंध में त्योंथर एसडीएम पी.एस. त्रिपाठी ने बताया कि उनके कार्यालय में आवेदन प्राप्त हुआ है। मामले में स्टे दिया गया है और जांच की जा रही है। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल बड़ा सवाल यही है कि प्रशासन कब तक इस “जिंदा भूत” को न्याय दिला पाएगा।
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