बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक वैवाहिक विवाद में पति द्वारा पत्नी और उसकी बहनों को लगातार अभद्र वॉट्सएप संदेश भेजने को मानसिक क्रूरता माना है।
जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू और जस्टिस सुषमा सावंत की युगलपीठ ने अंबिकापुर कुटुंब न्यायालय के तलाक की अर्जी खारिज करने के आदेश को रद करते हुए पत्नी अर्चना सिंह की अपील स्वीकार की।
हाई कोर्ट ने 5 दिसंबर 2021 को आनंद कुमार गुप्ता के साथ हुए विवाह को भंग करते हुए तलाक की डिक्री जारी की। अर्चना सिंह का विवाह 5 दिसंबर 2021 को बिहार के भोजपुर निवासी आनंद कुमार गुप्ता के साथ हुआ था।
दहेज में एयर कंडीशनर की मांग की
विवाह के बाद अर्चना ने आरोप लगाया कि पति ने मारपीट और गाली-गलौज शुरू कर दी और दहेज में एयर कंडीशनर की मांग की। मांग पूरी न होने पर गहने बेचने और जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया।
परेशान होकर अर्चना मायके अंबिकापुर आ गई। इसके बाद भी पति ने उसके मोबाइल और उसकी दो छोटी बहनों को वाट्सएप पर अभद्र संदेश भेजे।
स्थायी भरण-पोषण अर्जी के लिए भी स्वतंत्र
अर्चना ने तलाक के लिए अंबिकापुर कुटुंब न्यायालय में याचिका दायर की, लेकिन फैमिली कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। इसके खिलाफ उसने हाई कोर्ट में अपील की। सुनवाई के दौरान पति न्यायालय में उपस्थित नहीं हुआ।
हाई कोर्ट ने वॉट्सएप चैट को महत्वपूर्ण साक्ष्य मानते हुए पति के व्यवहार को गंभीर मानसिक पीड़ा से जोड़ा। कोर्ट ने स्थायी भरण-पोषण के लिए अर्चना को आवेदन प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता भी दी है।
