रीवा की बेटी ने बढ़ाया विंध्य का मान ओशिन सोलंकी पहली ही कोशिश में बनीं सिविल जज
Rewa's daughter Oshin Solanki has elevated the Vindhya region to become a civil judge on her first attempt.

लोकेशन -रीवा रिपोर्टर सुभाष मिश्रा

रीवा। विंध्य की धरती ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। रीवा की होनहार बेटी ओशिन सिंह सोलंकी ने मात्र 25 वर्ष की उम्र में और पहले ही प्रयास में सिविल जज की प्रतिष्ठित परीक्षा पास कर प्रदेशभर में मिसाल कायम की है। यह उपलब्धि न केवल परिवार, बल्कि पूरे विंध्य के लिए गर्व का क्षण बन गई है।

पहले प्रयास में बड़ी सफलता
कहते हैं यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मन में जुनून, तो राहें खुद-ब-खुद बन जाती हैं। ऐसा ही कर दिखाया है ओशिन ने। सख्त अनुशासन, निरंतर मेहनत और मजबूत आत्मविश्वास के दम पर उन्होंने फर्स्ट अटेम्प्ट में यह कठिन परीक्षा पास कर मध्य प्रदेश में 17वां स्थान हासिल किया है।
कानूनी माहौल से मिली दिशा
नेहरू नगर कॉलोनी निवासी ओशिन एक ऐसे परिवार से आती हैं जहां घर का वातावरण ही उन्हें कानून की राह दिखाता रहा। पिता दल बहादुर सिंह सोलंकी जिला न्यायालय में क्रिमिनल लॉयर हैं, जबकि मां आदर्श सिंह सोलंकी पीटीएस में एडीपीओ के पद पर पदस्थ हैं। ओशिन की प्रारंभिक शिक्षा बाल भारती स्कूल में हुई और आगे एपीएस यूनिवर्सिटी से बीए-एलएलबी पूरा किया।
सफलता का श्रेय माता-पिता को
ओशिन ने मीडिया से बातचीत में अपनी सफलता का पूरा श्रेय माता-पिता को दिया। उन्होंने बताया कि 2023 में पढ़ाई के दौरान ही सिविल जज की तैयारी शुरू कर दी थी। उसी वर्ष बीए-एलएलबी पूरा हुआ और साल के अंत तक आई वैकेंसी में परीक्षा दी। हाल ही घोषित परिणाम में पहले ही प्रयास में सफलता मिल गई।
छात्र-छात्राओं को प्रेरक संदेश
ओशिन ने युवाओं से कहा कि असफलता से डरें नहीं, बल्कि उससे सीखें। माता-पिता की सलाह मानें और सकारात्मक माहौल में रहें—सफलता एक दिन जरूर मिलेगी।
मां ने बताया—शुरुआत से मेधावी थी बेटी
माता आदर्श सिंह सोलंकी ने कहा कि ओशिन बचपन से ही मेधावी रही है। सही मार्गदर्शन और निरंतर मेहनत ने उसे यह मुकाम दिलाया है। उन्होंने विश्वास जताया कि आगे भी ओशिन अपने कर्तव्यों का जिम्मेदारी से निर्वहन करेगी।



