रीवा मप्र रिपोर्टर सुभाष मिश्रा
खाकी की निगरानी में 100+ बच्चों को मुफ्त शिक्षा, देश का अनोखा ‘थाना गुरुकुल’
मध्यप्रदेश के रीवा में पुलिस का एक चेहरा ऐसा भी है, जो अपराध से नहीं बल्कि भविष्य गढ़ने से जुड़ा है। शहर का अमहिया पुलिस थाना शाम होते ही क्लासरूम में तब्दील हो जाता है। दिन में जहां अपराध और कानून की बात होती है, वहीं शाम को वही परिसर ‘गुरुकुल’ बनकर 100 से अधिक जरूरतमंद बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देता है।
थाने का बोर्ड बना ब्लैकबोर्ड
शाम होते ही थाना परिसर का माहौल बदल जाता है। पुलिस का बोर्ड ब्लैकबोर्ड बन जाता है और खाकी वर्दी वाले अफसर शिक्षक की भूमिका में नजर आते हैं। यहां नर्सरी से लेकर कक्षा 10वीं तक के बच्चे पढ़ाई के साथ संस्कार, अनुशासन और देशभक्ति की सीख ले रहे हैं। तीन शिक्षकों के मार्गदर्शन में नियमित कक्षाएं संचालित हो रही हैं।
थाना प्रभारी शिवा अग्रवाल की पहल
इस अनूठी पहल के पीछे थाना प्रभारी शिवा अग्रवाल की सोच और संकल्प है। उन्होंने बताया कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान पढ़ाने के अनुभव से समाज को कुछ लौटाने का विचार आया। परिणामस्वरूप, बिना किसी डोनेशन और पूरी तरह पुलिस स्टाफ के सहयोग से यह अस्थायी स्कूल शुरू किया गया, जो पिछले 8 महीनों से सफलतापूर्वक चल रहा है।
गुरुकुल ने बुजुर्ग शिक्षक को दिया सम्मान
यहां पढ़ाने वालों में एक बुजुर्ग पूर्व शिक्षक भी शामिल हैं, जो जीवन के अंतिम पड़ाव में उपेक्षा झेल रहे थे। अमहिया थाने का गुरुकुल उनके लिए फिर से सम्मान और उद्देश्य लेकर आया है।
पर्सनालिटी डेवलपमेंट व सेल्फ डिफेंस पर फोकस
गुरुकुल में केवल पाठ्यक्रम ही नहीं, बल्कि पर्सनालिटी डेवलपमेंट, फ्यूचर गाइडेंस और सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग भी दी जा रही है। थाना प्रभारी के मुताबिक, जो बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं, वे भी यहां शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
सीनियर अफसरों की सराहना
गुरुकुल के संचालन से पुलिस के प्रति समाज में व्याप्त भय कम हुआ है। पूर्व पुलिस कप्तान विवेक सिंह और वर्तमान एसपी शैलेन्द्र सिंह चौहान सहित वरिष्ठ अधिकारी इस पहल की सराहना कर रहे हैं।
नतीजा साफ
थाने की चारदीवारी में अब डर नहीं, उम्मीद पल रही है। अमहिया थाना साबित कर रहा है कि पुलिस सिर्फ कानून की रक्षक नहीं, बल्कि समाज के भविष्य की निर्माता भी हो सकती है।
