रीवा मप्र | रिपोर्टर सुभाष मिश्रा
रीवा जिले के जवा विकासखंड से देर रात एक बड़ा मामला सामने आया, जहां प्रशासन की तत्परता ने एक नाबालिग लड़की की जिंदगी बदल दी। शादी का मंडप सज चुका था, मेहमान जुट चुके थे और बारात आने ही वाली थी… तभी अचानक लालबत्ती वाली गाड़ियां गांव में पहुंचीं और माहौल बदल गया।
जानकारी के मुताबिक, प्रभारी कलेक्टर सपना त्रिपाठी को जवा थाना क्षेत्र में नाबालिग लड़की के विवाह की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही उन्होंने महिला एवं बाल विकास विभाग, पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। देर रात प्रशासनिक अमला विवाह स्थल पर पहुंचा तो वहां शादी की पूरी तैयारियां हो चुकी थीं। टीम के पहुंचते ही परिजनों और मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया।
कार्रवाई में अहिंसा वेलफेयर सोसायटी और समग्र जन चेतना विकास परिषद ने भी अहम भूमिका निभाई। अधिकारियों और सामाजिक संगठनों ने परिजनों को बाल विवाह के दुष्परिणाम और कानून की जानकारी दी। बताया गया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की की शादी कराना अपराध है, जिसमें सख्त सजा का प्रावधान है।
काफी समझाइश के बाद परिजन मान गए और शादी रोकने के लिए सहमति दे दी। प्रशासन ने मौके पर पंचनामा तैयार कर परिजनों से लिखित आश्वासन लिया कि लड़की के बालिग होने तक उसका विवाह नहीं किया जाएगा। ग्रामीण अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मिश्रा ने बताया कि सामाजिक संगठनों से सूचना मिलने के बाद पुलिस-प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर बाल विवाह रुकवाया और भविष्य में दोबारा ऐसी कोशिश करने पर कड़ी वैधानिक कार्रवाई की चेतावनी दी।
समय रहते हुई इस कार्रवाई ने एक बेटी का भविष्य सुरक्षित कर दिया और समाज को साफ संदेश दिया कि बाल विवाह जैसी कुप्रथा के खिलाफ अब प्रशासन सख्त है।
