रवि भगत ने छोड़ी पार्टी, सियासी हलचल तेज

Ravi Bhagat quits party; political stir intensifies.

रायपुर। भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रवि भगत ने बुधवार को भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उनका इस्तीफा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। जिसके बाद प्रदेश की राजनीति में इसे लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

जानकारी के मुताबिक, रायगढ़ के लैलूंगा क्षेत्र से जुड़े भाजपा नेता रवि भगत ने पार्टी के मंडल अध्यक्ष रमेश होता को पत्र लिखकर अपना इस्तीफा भेजा है। इस्तीफे में सिर्फ निजी कारणों का ज़िक्र किया गया है।

इस्तीफे में निजी कारणों का ज़िक्र
पत्र में उन्होंने लिखा है कि एक छोटे से गांव के कार्यकर्ता होने के बावजूद भाजपा ने उन्हें पहचान और सम्मान दिया। जिसके लिए वे पार्टी के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। हालांकि, उन्होंने इस्तीफे में सिर्फ ‘निजी कारणों’ का जिक्र करते हुए भाजपा की प्राथमिक सदस्यता छोड़ने का फैसला लिया है।

उन्होंने अपने पत्र की प्रतिलिपि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष और जिला अध्यक्ष को भी भेजी है। रवि भगत का इस्तीफा सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

DMF फंड को लेकर लगातार सवाल उठाते रहे भगत

रवि भगत पिछले कुछ समय से डीएमएफ (जिला खनिज न्यास) फंड के इस्तेमाल को लेकर लगातार सवाल उठाते रहे हैं। उन्होंने कई बार सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों के जरिए डीएमएफ फंड में कथित अनियमितताओं और खर्च के तरीके पर सवाल खड़े किए।

उनके इन बयानों को लेकर संगठन के भीतर भी चर्चा होती रही। इसके बाद पार्टी की ओर से उन्हें कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया था। अब उनके इस्तीफे के बाद डीएमएफ फंड को लेकर उठाए गए उनके सवालों की भी फिर से चर्चा शुरू हो गई है।

सोशल मीडिया पर भी इस्तीफे की कॉपी तेजी से शेयर की जा रही है। इस संबंध में हमने उनसे फोन पर बातचीत करने की भी कोशिश की लेकिन उन्होने कोई जवाब नहीं दिया।

पहले कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया था

यह पहला मौका नहीं है जब रवि भगत को लेकर संगठन ने सख्ती दिखाई हो। इससे पहले 26 जुलाई 2025 को भाजपा प्रदेश कार्यालय की ओर से उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। नोटिस में सोशल मीडिया पर पार्टी की रीति-नीति और संगठनात्मक अनुशासन के खिलाफ टिप्पणी करने का आरोप लगाया गया था।

प्रदेश महामंत्री और मुख्यालय प्रभारी जगदीश (रामू) रोहरा ने उनसे तीन दिन के भीतर जवाब मांगा था और स्पष्ट किया था कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासन की कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे में उनके इस्तीफे को इसी घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है।

Exit mobile version