आस्था भक्ति और संस्कृति के तीर्थ राजिम को इसलिए कहा जाता है छत्तीसगढ़ का प्रयागराज

रिपोर्टर : लोकेश्वर सिन्हा

गरियांबद। छत्तीसगढ़ का “प्रयाग” कहे जाने वाले राजिम की पहचान पहले से ही आस्था, धर्म, संस्कृति की नगरी के नाम से विख्यात है, प्रतिवर्ष यहां माघ पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक विशाल मेले का आयोजन होता है, इस बार छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार द्वारा राजिम कुंभ कल्प के नाम से मेला आयोजित की गई है।

आज माघ पूर्णिमा से कुंभ की शुरुआत हो गई है, माघ पूर्णिमा का यह दिन इसलिए भी खास है की आज के दिन को राजिम के मुख्य मंदिर में विराजमान भगवान राजीव लोचन के प्राक्टय उत्सव के रूप में भी मनाया जाता है, इसी आस्था और विश्वास के चलते प्रदेश सहित देशभर से श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचकर तड़के सुबह आस्था की डुबकी लगाकर भगवान कुलेश्वरनाथ और राजीवलोचन जी के दर्शन कर अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं, त्रिवेणी संगम तट पर स्थित राजिम में है, भगवान राजीवलोचन का प्राचीनतम मंदिर, जहां चतुर्भुजी विष्णु के रूप विराजमान है, जो हाथों में शंख, चक्र, गदा तथा पद्म धारण किए हुए हैं।

ऐसी मान्यता है कि भगवान राजीवलोचन जी के प्राक्टय उत्सव के दिन पुरी में स्थित भगवान जगन्नाथ की मंदिर के पट कुछ समय के लिए बंद रहता है, कहते है कि आज के ही दिन जगन्नाथ जी स्वयं राजीवलोचन को बधाई देने यहां पहुंचते है, जिसके चलते आज के इस विशेष दिन पर भगवान राजीवलोचन के मंदिर का पट दिनभर श्रद्धालुओं के लिए खुला रहता है।

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