जिला ब्यूरो: मीनू साहू
बालोद :- छत्तीसगढ़ के बालोद जिला में डौंडीलोहारा क्षेत्र की ग्राम पंचायत कसहीकला में प्रधानमंत्री आवास योजना केवल नाम मात्र रह गई है। सरकारी घोषणाएं गूंजती हैं, लेकिन वास्तविक लाभ देने में प्रशासन नाकाम है। करीब 25 से 30 परिवार आज भी पक्के घर से वंचित हैं। गरीब महिलाएं बारिश में बच्चों को टूटे मकानों से बाहर निकालती हैं, तो बुजुर्ग धूप और ठंड में खुले आसमान के नीचे जीवन बिताते हैं। अधिकारी मौके पर झांकते तक नहीं, केवल रिपोर्ट बनाने में संतुष्ट रहते हैं। ग्राम पंचायत कसहीकला के लोगों का कहना है कि योजनाएं सिर्फ भाषणों और पोस्टरों में चमकती हैं। असलियत इतनी कड़वी है कि गरीबों का आशियाना पाने का सपना टूटता जा रहा है। यह स्थिति बताती है कि कसहीकला जैसे गांव अब भी विकास से कोसों दूर हैं।
