छत्तीसगढ़
राजिम कुंभ कल्प के शुभारंभ से पहले ही सियासत तेज हो गई है
Politics has intensified even before the start of Rajim Kumbh Kalpa.
लोकेश्वर सिन्हा, गरियाबंद
गरियाबंद : राजिम कुंभ कल्प के शुभारंभ से पहले ही सियासत तेज हो गई है।
पूर्व विधायक अमितेश शुक्ल ने गरियाबंद जिला मुख्यालय मे प्रेस वार्ता मे आयोजन को लेकर भाजपा सरकार पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
शराब दुकान बंद न करने से लेकर, महंगे ठेकों और धान खरीदी में लापरवाही तक—
सरकार पर सीधे-सीधे जनता और किसानों पर बोझ डालने का आरोप लगाया गया है।
राजिम में 1 फरवरी से 15 फरवरी तक कुंभ कल्प का आयोजन होना है,
लेकिन आयोजन शुरू होने से पहले ही राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। राजिम के पूर्व विधायक अमितेश शुक्ल ने कुंभ आयोजन की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं।
पूर्व विधायक का आरोप है कि
धार्मिक आयोजन होने के बावजूद अब तक प्रशासन की ओर से शराब दुकानों को बंद करने का कोई आदेश जारी नहीं किया गया है।
जबकि राजिम कुंभ एक धार्मिक आयोजन है, लेकिन सरकार श्रद्धालुओं की भावनाओं से खिलवाड़ कर रही है।
अब तक शराब दुकान बंद करने का आदेश नहीं दिया गया,
ये बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।”
इतना ही नहीं, अमितेश शुक्ल ने
कुंभ के आयोजन में इवेंट कंपनी को महंगे दर पर ठेका देने का भी आरोप लगाया है।
साथ ही मीना बाजार को भी ऊंचे रेट पर देने की बात कही है। उनका कहना है कि
इसका सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ेगा।
सरकार ने सिर्फ नाम बदला है,
लेकिन कुंभ की भव्यता खत्म कर दी है। महंगे ठेकों का बोझ आखिरकार जनता पर ही पड़ेगा।”
कुंभ के मुद्दे के साथ-साथ
पूर्व विधायक ने धान खरीदी व्यवस्था को लेकर भी सरकार को घेरा।
उन्होंने आरोप लगाया कि खरीदी केंद्रों में भारी लापरवाही हो रही है, लेकिन प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा।
कुंडेलभाठा संग्रहण केंद्र का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि पिछले साल यहां 27 करोड़ रुपये का सूखत सामने आया था, लेकिन अब तक जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
किसान परेशान हैं, धान खरीदी में अव्यवस्था है। सूखत के इतने बड़े मामले में भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
साथ ही उन्होंने कहा की सरकार को धान खरीदी की तारीख बढ़ानी चाहिए।”
कुल मिलाकर, राजिम कुंभ कल्प से पहले उठे इन सवालों ने सरकार और प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि
सरकार इन आरोपों पर क्या जवाब देती है
और श्रद्धालुओं व किसानों को राहत देने के लिए क्या कदम उठाती है।



