रायपुर । 7 करोड़ का ड्रग्स जब्त, 9 करोड़ की संपत्ति कुर्क, 208 केस दर्ज, 369 आरोपी गिरफ्तार; 9 महीने में 188 मामलों के 299 आरोपियों को सजा
नशा तस्करों को जल्द सजा दिलाने के लिए प्रदेश में विशेष और फास्ट ट्रैक कोर्ट की संख्या बढ़ाई जाएगी। जगदलपुर में जल्द विशेष अदालत खोली जाएगी। इसके बाद अन्य शहरों में भी मादक पदार्थों से जुड़े मामलों की सुनवाई की व्यवस्था की जाएगी। रायपुर समेत 4-5 जगहों पर ही ऐसी अदालतें हैं। साथ ही राज्य स्तरीय एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स का गठन भी किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, केंद्र सरकार नशे के खिलाफ कार्रवाई को और सख्त करने की तैयारी में है। इसमें तस्करों की गिरफ्तारी से लेकर उन्हें सजा दिलाने तक हर स्तर पर प्रभावी कार्रवाई पर जोर दिया जाएगा।
रायपुर जिले में ये सब जब्त
रायपुर पुलिस कमिश्नरेट ने इस साल तस्करी के 208 मामले दर्ज कर 369 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने करीब 7 करोड़ रुपए के मादक पदार्थ जब्त किए हैं। वहीं, सफेमा के तहत 4 तस्करों की करीब 9 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्ति कुर्क की गई है। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान 1314 किलो गांजा, 33 हजार नशीली टैबलेट, 187 ग्राम एमडीएमए, 167 ग्राम हेरोइन, 151 ग्राम अफीम और 5 ग्राम कोकीन जब्त की है। इसके अलावा नशीले सिरप की 472 बोतलें और 550 प्रतिबंधित इंजेक्शन भी जब्त किए गए हैं।
बड़ी कार्रवाई: 50 मामलों में 101 तस्करों को 10 साल से ज्यादा सजा
नारकोटिक्स की विशेष अदालतों ने इस साल 9 माह में 188 मामलों में 299 तस्करों को सजा सुनाई है। इनमें 101 मामलों में 138 तस्करों को 10 साल से कम सजा हुई। वहीं, 37 मामलों में 60 तस्करों को 10 साल तक की सजा सुनाई गई। इसके अलावा 50 मामलों में 101 तस्करों को 10 साल से अधिक की सजा हो चुकी है। 2025 में 12 माह के दौरान 197 मामलों में 336 तस्करों को सजा सुनाई गई थी। इनमें 10 साल से अधिक सजा के प्रावधान वाले 34 मामलों में 82 तस्कर शामिल थे।
मॉनिटरिंग: तस्करी के मामलों की रोज निगरानी के लिए बनाई गई अलग टीम
पुलिस कमिश्नरेट में अदालतों में चल रहे मामलों की निगरानी के लिए अलग टीम बनाई गई है। इसमें टीआई रैंक के एक अधिकारी को जिम्मेदारी दी गई है। यह अधिकारी तस्करी से जुड़े मामलों की रोजाना निगरानी करता है और हर सुनवाई में अदालत पहुंचता है। वह गवाहों से संपर्क करने, केस डायरी अपडेट कराने और मामले में मिली कमियों को दूर कराने का काम भी करता है। मामलों की नियमित निगरानी से तस्करी के प्रकरणों में सजा दिलाने में मदद मिल रही है। जिन अधिकारियों की कार्रवाई में आरोपियों को सजा होती है, उन्हें इनाम दिया जाता है।
