
रिपोर्टर : सुभाष मिश्रा
रीवा एमपी। जल ही जीवन है जल के बिना जीवन की कल्पना बेमानी है। जहां अशुद्ध जल अनेकों बीमारियों की जननी होती है और बारिश के समय ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में तेजी से बीमारियां फैलती हैं। इसी को दृष्टिगत रखते हुए देश के प्रधानमंत्री ने जल जीवन मिशन की कल्पना कर हर घर नल से जल पहुंचाने के लिए महत्वाकांक्षी योजना चलाई।
अब तो स्पष्ट होने लगा है कि प्रधानमंत्री कितनी भी संवेदनशीलता से जनहित का चिंतन करें, लेकिन योजनाओं का क्रियान्वयन तो कार्यपालिका के तंत्र को करना है। जब कार्यपालिका में भ्रष्टाचार की सुरसा अपना मुंह नहीं सिकुड़ेगी या उसके मुंह को सिलने का काम व्यवस्थापिका में निर्वाचित होकर आसीन जनता के कर्णधार नहीं करेंगे तब तक यह योजना जनहित से कोसों दूर रहेगी।
ऐसा ही प्रमाण जवा तहसील अंतर्गत लूक ग्राम पंचायत के सांगीटोला में जनता के सामने आया है, लगभग विगत पांच छः माह पूर्व बनी थी। वहीं शाम 5.30 लगभग पानी की टंकी की साफ-सफाई के लिए तीन श्रमिक लगे हुए थे, गर्मी के कारण प्यास हुए तो संयोगवश तीनों टंकी से कुछ दूरी पर लगे नल की टोंटी से पानी पीकर जब वापस आए तो टंकी जमींदोज हो चुकी थी, वहीं पानी की टंकी के नीचे दो चार बच्चे खेल रहे थे, तभी एक बच्चा अपने परिजन को बताया की टंकी के ऊपर से गिट्टी गिर रही है तब परिजन ने बच्चों को गोद उठकर वह से निकल गया, निकलते ही पानी की टंकी जमी दोज हो गई। गनीमत रही जो बच्चे टंकी के पास खेल रहे थे, उन सभी को वहां से निकल लिया गया। टंकी गिरने की आवाज सुनकरआसपास के लोग भी भाग कर देखने आए सबने ईश्वर का शुक्र मनाया कि तीनों श्रमिक और बच्चे सुरक्षित बच गए। अब सवाल उठता है ऐसे निर्माण का जिम्मेदार कौन? क्या सिर्फ ठेकेदार को जिम्मेदार ठहराकर मुंह मोड़ लेंगे।



