अधूरे आवासों के कराया गृह प्रवेश

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लोकेशन_गरियाबंद

रिपोर्टर_ लोकेश्वर सिन्हा

गरियाबंद जिले में अधूरे पीएम आवास को न केवल कागजों में पूर्ण दिखाया गया बल्कि 1 नवम्बर को आधा अधूरा आवास वाले कई हितग्राहियों को पीएम के हाथों हुए सामूहिक गृह प्रवेश की सूची में नाम शामिल कर उन्हें गृह प्रवेश करा दिया।वाहवाही लूटने के चक्कर में अफसरों ने यह तक नहीं देखा कि जिनके नाम वे सामूहिक गृह प्रवेश की सूची में डाल रहे उनके आवासों की छत तक की ढालाई नहीं की गई है। पीएम आवास योजना में पीएम के ही आंखों के कैसे धूल झोंका गया।

देखिए यह रिपोर्ट…!

व्हिओ1_ पीएम आवास योजना के तहत मंजूर इन निर्माणाधीन आवासों को देखिए…

कागजों में ये पूर्ण बताए गए हैं..!शासन को आवास में प्रगति चाहिए थी लिहाजा प्रशाशन 30 फीसदी अधूरे आवास को भी पूर्ण बता दिया…फेलियर सिस्टम की नापाक करतूत यही नहीं थमी, अधूरे आवासों को देश के प्रधान मंत्री के हाथों गृह प्रवेश तक करवा दिया। स्थानीय जनप्रतिनिधियों के हाथ मैनपुर जनपद में सामूहिक गृह प्रवेश करने वाले 3817 लोगों के नाम की सूची हाथ लगी। जिसकी पड़ताल करने पर उन्होंने एक तिहाई से ज्यादा आवासों को अपूर्ण होने का दावा किया।सच्चाई जानने हमने भी मैनपुर ब्लॉक के धनोरा, मूढ़गेलमाल, घुमरापदर, चिखली, सरनाबहाल जैसे बीहड़ों में मौजूद 15 से ज्यादा पंचायतों तक पहुंच सच्चाई की पड़ताल किया। सच्चाई प्रशासनिक कागजी दावों के पोल खोलने वाले थे

व्हीओ 2_ 6 माह पहले ही अधूरे आवास को पूर्ण बताने के खेल का भंडा फूटा था, तब देवभोग से लेकर छूरा ब्लॉक तक के आधा दर्जन आवास मित्र, देवभोग के तत्कालीन जनपद सीईओ से लेकर जिला पंचायत सीईओ तक हटा दिए गए ताकि पीएम मोदी के नाम से जुड़ी सरकार के इस महत्वाकांक्षी योजना का बेहतर क्रियान्वयन हो। अफसर बदले गए गांव गांव मॉनिटरिंग होती रही। कई गांवों में हितग्राही महीनों से शिकायत कर आवास योजना में गड़बड़ी उजागर कर जांच की मांग उठाते रहे पर जिले में आवास निर्माण की प्रगति दिखाने के धुन में सवार अफसरों ने सारी गड़बड़ियां नजर अंदाज करते रहे। ग्राम पंचायत के सरपंच से लेकर सचिव तक की जिम्मेदारी थी पर ये गैर जिम्मेदार भी कैमरे से बचते नजर आए। जनपद के अफसर गांव गांव घूम कर केवल निर्माण का लक्ष्य पुरा करने हिदायत देते दिखे, शिकायतें भी संज्ञान में है, फिर भी मौके तक पहुंच रिकॉर्ड का मिलान नहीं कर रहे अब जब हमने सवाल किया तो रिकॉर्ड के आधार पर भौतिक सत्यापन करने की बात कह रहे हैं।

 

 

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