नई दिल्ली: लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता Gaurav Gogoi ने मंगलवार को कहा कि सदन में सभी सदस्यों के साथ समान व्यवहार न किए जाने और संसद की गरिमा को बनाए रखने के उद्देश्य से विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष Om Birla के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया है।
अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा की शुरुआत करते हुए गोगोई ने कहा कि अध्यक्ष के व्यक्तिगत संबंध भले ही सभी सदस्यों के साथ अच्छे हों, लेकिन सदन में सभी के साथ समान व्यवहार नहीं किया जाता। उन्होंने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष का दायित्व अत्यंत महत्वपूर्ण होता है और उन्हें सदन का संरक्षक होना चाहिए, न कि सरकार की आवाज बनना चाहिए।
गोगोई ने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान विपक्ष के नेता Rahul Gandhi को अपनी बात पूरी तरह रखने का मौका नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष के कई नेताओं ने उनके भाषण के दौरान बार-बार टोका-टाकी की।
उन्होंने यह भी दावा किया कि राहुल गांधी चीन से जुड़े सीमा मुद्दे सहित कई महत्वपूर्ण विषय उठाना चाहते थे। गोगोई के अनुसार, उस समय के सेना प्रमुख Manoj Mukund Naravane ने रक्षा मंत्री से कार्रवाई के लिए आदेश मांगा था, लेकिन कई घंटों बाद प्रधानमंत्री की ओर से संदेश आया कि “जो उचित समझो, करो।”
इस दौरान संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju ने आपत्ति जताते हुए कहा कि चर्चा अविश्वास प्रस्ताव के मुद्दे से भटक रही है। इस पर गोगोई ने पलटवार करते हुए कहा कि यदि सदन में टोका-टाकी की गणना की जाए तो रिजिजू सबसे अधिक हस्तक्षेप करने वाले संसदीय कार्य मंत्री साबित होंगे।
वहीं गृह मंत्री Amit Shah ने विपक्ष की आलोचना करते हुए कहा कि इतना गैर-जिम्मेदार विपक्ष पहले कभी नहीं देखा गया, इसलिए हस्तक्षेप करना पड़ रहा है।
गोगोई ने अपने वक्तव्य में यह भी कहा कि अमेरिका के न्याय विभाग द्वारा जारी कुछ दस्तावेजों में एक भारतीय कारोबारी और एक मंत्री का नाम सामने आया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने अमेरिका के साथ ऐसे व्यापार समझौते पर सहमति दी है, जिससे देश के व्यापार और कृषि क्षेत्र को नुकसान हो सकता है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या इन फैसलों के पीछे किसी प्रकार का अंतरराष्ट्रीय दबाव है। साथ ही उन्होंने जनरल नरवणे की किताब में किए गए दावों पर भी सरकार से स्पष्टीकरण मांगा।
इससे पहले कांग्रेस सांसद Mohammad Jawed ने लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया, जिसे 50 से अधिक सांसदों ने खड़े होकर समर्थन दिया।
इस दौरान Asaduddin Owaisi ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि अध्यक्ष के खिलाफ प्रस्ताव आने के बाद उनके द्वारा नियुक्त पैनल का कोई सदस्य पीठासीन नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि चूंकि वर्तमान में लोकसभा का उपाध्यक्ष नहीं है, इसलिए सदन की सहमति से किसी अन्य सदस्य को पीठासीन बनाया जाना चाहिए।
कांग्रेस के K. C. Venugopal और तृणमूल कांग्रेस के Saugata Roy ने भी इस मुद्दे पर समान राय व्यक्त की, हालांकि पीठासीन अधिकारी Jagadambika Pal ने व्यवस्था के प्रश्न को स्वीकार नहीं किया।
