कभी कर्ज का बोझ, अब आत्मनिर्भरता की राह पर रेशम

Once burdened by debt, silk is now on the path to self-reliance.

पिंक ई-ऑटो ने बदली जिंदगी, 8-10 हजार की पारिवारिक आय बढ़कर हुई 25-30 हजार रुपये
ई-ऑटो की कमाई से चुकाया बढ़ा हुआ कर्ज, परिवार की जरूरतें पूरी करने में मिली आर्थिक मजबूती

रायपुर। कभी घर का खर्च चलाने के लिए उधार लेना पड़ता था। कारोबार में हुए नुकसान और बढ़ते कर्ज की चिंता हर महीने सामने खड़ी रहती थी। लेकिन आज पिंक ई-ऑटो चलाते हुए ग्राम बेंद्री की श्रीमती रेशम साहू न केवल अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियां संभाल रही हैं, बल्कि आत्मनिर्भरता की एक नई पहचान भी बना रही हैं। रेशम की जिंदगी में आया यह बदलाव बताता है कि जब महिलाओं को अवसर, साधन और सहयोग मिलता है, तो वे मुश्किल परिस्थितियों को भी नई दिशा दे सकती हैं।
रायपुर जिला के विकासखंड अभनपुर के ग्राम बेंद्री निवासी श्रीमती रेशम साहू ‘कल्याणी समर्थन महिला स्व-सहायता समूह’ से जुड़ी हैं। कुछ समय पहले तक रेशम अपने पति हरीश साहू के साथ जनरल स्टोर और सिलाई का काम करती थीं। दोनों की संयुक्त मासिक आय करीब 8 से 10 हजार रुपये थी। सीमित आमदनी में घर चलाना आसान नहीं था। परिवार की जरूरतों के लिए कई बार उधार लेना पड़ता था।
छोटे कारोबार से बढ़ा कर्ज, चिंता में बीते दिन
रेशम ने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए 60 हजार रुपये का ऋण लिया था। परिस्थितियां अनुकूल नहीं रहीं और ब्याज बढ़ने के साथ यह राशि बढ़कर 1.83 लाख रुपये तक पहुंच गई। जनरल स्टोर और सिलाई के काम में हुए आर्थिक नुकसान के बाद रेशम पर 12 हजार रुपये प्रतिमाह की व्यक्तिगत ऋण किस्त का अतिरिक्त बोझ भी था।
ऐसे समय में पिंक ई-ऑटो उनके लिए सिर्फ एक वाहन बनकर नहीं आया, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति को संभालने का नया सहारा बन गया।
पिंक ई-ऑटो बना नई उम्मीद का पहिया
पिंक ई-ऑटो मिलने के बाद रेशम ने खुद ई-ऑटो चलाना शुरू किया। मेहनत बढ़ी तो आमदनी भी बढ़ी। आज वे हर महीने करीब 25 से 30 हजार रुपये तक कमा रही हैं। अपनी कमाई से उन्होंने बढ़े हुए कर्ज की राशि भी चुका दी है। व्यक्तिगत ऋण की 12 हजार रुपये की मासिक किस्त नियमित रूप से जमा करने के साथ अब वे परिवार की जरूरतों को भी पहले की तुलना में बेहतर तरीके से पूरा कर पा रही हैं।
रेशम के लिए यह बदलाव सिर्फ आय बढ़ने तक सीमित नहीं है। आर्थिक परेशानियों के बीच जिस महिला को कभी उधार और कर्ज की चिंता सताती थी, वही महिला आज अपने पैरों पर खड़ी होकर परिवार की जिम्मेदारियों में मजबूती से भागीदारी निभा रही है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की सोच को जमीन पर मिल रही नई दिशा
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और ग्रामीण परिवारों की आजीविका को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों से रेशम जैसी महिलाओं को अपनी क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है।
रेशम साहू के लिए यह अवसर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण और आजीविका को प्राथमिकता देने वाली सोच का परिणाम है। वे इस पहल के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करती हैं।
वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी की पहल से नवा रायपुर में आजीविका और परिवहन का नया मॉडल
वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में नवा रायपुर अटल नगर में सुरक्षित, सुगम और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन के साथ महिलाओं को स्थायी आजीविका से जोड़ने की दिशा में ‘प्रोजेक्ट पिंक ई-ऑटो’ को आगे बढ़ाया जा रहा है। नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के संयुक्त प्रयास से संचालित यह पहल महिलाओं के लिए रोजगार का नया अवसर बन रही है।
रेशम साहू इस पहल के लिए मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के प्रति भी आभार व्यक्त करती हैं। उनका कहना है कि पिंक ई-ऑटो ने उन्हें अपनी मेहनत से आय अर्जित करने और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का अवसर दिया है।
92 महिलाओं को मिला आजीविका का नया साधन
‘प्रोजेक्ट पिंक ई-ऑटो’ के दोनों चरणों में अब तक कुल 92 स्व-सहायता समूह की महिलाओं को ई-ऑटो उपलब्ध कराकर आजीविका से जोड़ा गया है। इनमें प्रथम चरण की 40 और द्वितीय चरण की 52 महिला लाभार्थी शामिल हैं। यह पहल महिलाओं को रोजगार से जोड़ने के साथ नवा रायपुर में महिला-आधारित, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक परिवहन को भी बढ़ावा दे रही है।

रेशम की कहानी में दिखता है बदलाव का पहिया
रेशम साहू की कहानी उस बदलाव की कहानी है, जहां कभी कर्ज चिंता का कारण था, वहीं आज मेहनत और अवसर से वही परिवार आर्थिक मजबूती की ओर बढ़ रहा है। पिंक ई-ऑटो के पहियों के साथ रेशम की जिंदगी भी आगे बढ़ रही है-उधार से आत्मनिर्भरता की ओर, चिंता से आत्मविश्वास की ओर और सीमित आमदनी से बेहतर भविष्य की ओर।
रेशम की यह कहानी बताती है कि सेवा तब सार्थक होती है, जब वह किसी जरूरतमंद के जीवन में अवसर बनकर पहुंचे और उस अवसर से उसके सपनों को आगे बढ़ने का रास्ता मिले।

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